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मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल के ICU में भीषण आग, 4 मरीजों की मौत, मचा हड़कंप

Muzaffarpur Hospital Fire

Muzaffarpur Hospital Fire

नेशनल डेस्क: बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में गुरुवार तड़के एक निजी अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में अब तक 4 मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है और कई अन्य मरीजों को गंभीर हालत में दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रशासन को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

जानकारी के अनुसार, आग सुबह करीब 3 बजे अस्पताल के आईसीयू वार्ड में लगी। उस समय आईसीयू में कई गंभीर मरीज भर्ती थे। आग लगने के बाद पूरे वार्ड में धुआं फैल गया, जिससे मरीजों की सांस लेने में दिक्कत होने लगी और स्थिति बेहद गंभीर हो गई। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर कुल 15 मरीजों को बाहर निकाला। इनमें से तीन मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकी, जबकि बाकी मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजा गया।

फायर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सूचना सुबह करीब 3:55 बजे मिली थी। इसके बाद छह दमकल गाड़ियों को तुरंत मौके पर भेजा गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया गया।

प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आईसीयू में ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, हार्ट मॉनिटर और अन्य कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे होते हैं। इनमें से किसी मशीन में तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट होने से आग भड़क सकती है। हालांकि, आग के सही कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर गई है।

मुजफ्फरपुर के जिला प्रशासन के अनुसार, आईसीयू में 13 नियमित बेड थे, जबकि दो अतिरिक्त बेड भी लगाए गए थे। आग लगने के समय वहां गंभीर मरीज भर्ती थे, इसलिए उन्हें तुरंत दूसरे अस्पतालों के आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा।

घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के समय अस्पताल की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं मिला। मीडिया द्वारा संपर्क करने की कोशिश के बावजूद प्रबंधन का कोई प्रतिनिधि सामने नहीं आया। फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

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