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भारत न भगवा-ए-हिंद बनेगा और न ही गजवा-ए-हिंद : मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

Maulana Shahabuddin Razvi

Maulana Shahabuddin Razvi

Maulana Shahabuddin Razvi : ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री और रामभद्राचार्य पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। न तो यह भगवा-ए-हिंद बनेगा और न ही गजवा-ए-हिंद। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री और रामभद्राचार्य मौसम के हिसाब से बयान देते हैं। बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। सभी राजनीतिक दल इसमें कूद पड़े हैं। इस राजनीतिक माहौल में दोनों कथावाचकों ने हिंदू राष्ट्र बनाने का ऐलान कर दिया है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा है कि अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनता है तो इसकी शुरुआत बिहार से होगी।

हिंदू और मुसलमानों को आपस में बांटना-
रजवी ने कहा कि शास्त्री ने यह बयान चुनाव को ध्यान में रखकर दिया है। ऐसा इसलिए कहा क्योंकि बिहार में चुनाव होने वाले हैं। उन्हें चुनाव में ध्रुवीकरण करना है। उन्हें हिंदू और मुसलमानों को आपस में बांटना है। यह उनकी रणनीति है। वे चुनाव में एक पार्टी को जिताना चाहते हैं। यह उनकी खास मंशा है।

मुस्लिमों ने गजवा-ए-हिंद के नारे को किया खारिज-
मौलाना ने कहा कि दूसरे कथावाचक रामभद्राचार्य ने बयान दिया था कि जिस दिन भारत में 80 प्रतिशत हिंदू आबादी हो जाएगी, उस दिन भारत को भगवा-ए-हिंद घोषित कर दिया जाएगा। उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। भारत सरकार के हिसाब से यहां 19 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और 81 प्रतिशत गैर मुस्लिम आबादी है। उन्होंने गजवा-ए-हिंद के मुकाबले भगवा-ए-हिंद का नारा दिया है, हालांकि वे भगवा-ए-हिंद का नारा लगा रहे हैं, लेकिन भारत के मुसलमानों ने गजवा-ए-हिंद के नारे को खारिज कर दिया है।

उग्रवादी विचारधारा को मिलता है बल-
मौलाना ने आगे कहा कि ये दोनों कथावाचक ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों को बल मिल रहा है। इन दोनों के नारों और कट्टरपंथी लोगों के नारों में क्या अंतर है? ऐसी बातें भारत की छवि खराब करती हैं और कट्टरपंथी लोगों का मनोबल बढ़ाती हैं। भारत कभी हिंदू राष्ट्र या इस्लामिक राष्ट्र नहीं बन सकता। यह एक लोकतांत्रिक देश है। धीरेन्द्र शास्त्री और रामभद्राचार्य के बयान समस्या पैदा कर सकते हैं और उग्रवादी विचारधारा को बल दे सकते हैं।

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