नेशनल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा से फोन पर बातचीत की, जिसमें उन्होंने बहरीन पर हुए हालिया हमलों की निंदा की और वहां के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की। पीएम मोदी ने बहरीन में भारतीय समुदाय को दिए गए अटूट समर्थन के लिए किंग को धन्यवाद भी दिया।
फोन पर बातचीत के बाद पीएम मोदी ने पोस्ट किया कि बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा से सार्थक बातचीत हुई। भारत बहरीन पर हुए हमलों की निंदा करता है और इस कठिन घड़ी में वहां के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। बहरीन में भारतीय समुदाय को दिए गए अटूट समर्थन के लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।
Had a productive telephone conversation with the King of Bahrain, His Majesty King Hamad Bin Isa Al Khalifa. India condemns the attacks on Bahrain and stands in solidarity with its people in this difficult hour. I thank him for the steadfast support extended to the Indian…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 2, 2026
दिन में पहले बहरीन डिफेंस फोर्स के जनरल कमांड ने कहा कि उसके मिसाइल वायु रक्षा प्रणालियों ने बहरीन को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमलों को नाकाम कर दिया है। जनरल कमांड ने बताया कि 61 मिसाइलें और 34 मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) नष्ट कर दिए गए हैं। बहरीन समाचार एजेंसी के अनुसार, जनरल कमांड ने आगे कहा कि सभी रक्षा प्रणालियां किसी भी संभावित खतरे को तत्काल और निर्णायक रूप से रोकने के लिए तैयार हैं।
जनरल कमांड ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिक बुनियादी ढांचे और निजी संपत्ति को निशाना बनाने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों और यूएवी का उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सिद्धांतों, विशेष रूप से भेद और आनुपातिकता के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है। उसने कहा कि ये अंधाधुंध और गैरकानूनी हमले क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं।
बहरीन ने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करने के अपने वैध अधिकार पर जोर दिया। जनरल कमांड ने बहरीन के सभी नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने, घरों के अंदर रहने और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने का आग्रह किया। लोगों से आधिकारिक और सत्यापित सूचना स्रोतों पर भरोसा करने, अफवाहों पर ध्यान न देने और हमले वाले स्थानों से दूर रहने का अनुरोध किया गया है।
पश्चिम एशिया में ताजा संघर्ष ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य तेहरान की मिसाइल क्षमताओं और व्यापक सैन्य बुनियादी ढांचे को कमजोर करना था।