
नेशनल डेस्क। (आकाश द्विवेदी)ः मिजोरम के लिए कनेक्टिविटी और विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। राज्य की राजधानी आइजोल को जल्द ही पहली बार राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके लिए 51.38 किमी लंबी बैराबी–सैरांग ब्रॉड गेज रेललाइन तैयार है, जो आने वाले कुछ महीनों में संचालन के लिए शुरू हो जाएगी। यह परियोजना भारत सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीतिक योजना का हिस्सा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार हाल ही में होर्टोकी से सैरांग के बीच अंतिम चरण की सुरक्षा जांच रेलवे सुरक्षा आयुक्त द्वारा पूरी कर ली गई है और 110 किमी/घंटा की रफ्तार से हाई स्पीड ट्रायल रन भी सफलतापूर्वक कर लिया गया है।
परियोजना प्रमुख विनोद कुमार ने इसे देश की सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग परियोजनाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा, “बैराबी–सैरांग रेललाइन केवल रेलवे लाइन नहीं बल्कि मिज़ोरम के लिए जीवनरेखा है। इस रेलखंड में 48 सुरंगें और 153 पुल हैं जिनमें 55 बड़े पुल शामिल हैं। ब्रिज नंबर 144 कुतुब मीनार से भी ऊंचा है, जो इस परियोजना की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है।”

करीब 5,021 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह परियोजना भौतिक रूप से 94 फीसदी और वित्तीय रूप से 97 फीसदी पूरी हो चुकी है। इस रेललाइन का पूरा स्ट्रक्चर भूकंपीय गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है और प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से इसकी संरचनात्मक जांच कराई गई है।
इस रेललाइन का एक प्रमुख आकर्षण 104 मीटर ऊंचा रेल पियर है, जो देश में सबसे ऊंचा है। इस खंड में होर्टोकी, कावनपुई, मुआलखांग और सैरांग जैसे स्टेशन तैयार हैं। सैरांग, आइजोल से मात्र 20 किमी दूर स्थित होगा और मिज़ोरम का मुख्य रेलहेड बनेगा, जिससे यात्री और माल ढुलाई में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

यह रेललाइन राज्य में परिवहन लागत को घटाने, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा की बेहतर सुविधाओं तक पहुंच आसान बनाएगी। इसके साथ मिज़ोरम पूर्वोत्तर के असम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश के बाद चौथी राजधानी होगी, जो राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगी। भविष्य में इसे ज़ोरिनपुई तक बढ़ाकर भारत-म्यांमार सीमा तक जोड़ने की योजना है, जिससे कालादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट को भी बल मिलेगा।
सैरांग से लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन और स्टेशन पर व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है। इस ऐतिहासिक रेललाइन के संचालन से मिज़ोरम में प्रगति के नए द्वार खुलेंगे और पूर्वोत्तर भारत का देश की मुख्यधारा से संपर्क और सशक्त होगा।