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‘मोबाइल बच्चों का मालिक बन चुका है’, पीएम मोदी ने छात्रों को दी सलाह- ‘टेक्नोलॉजी के गुलाम न बनें, खुद का विस्तार करें’

Pariksha Pe Charcha 2026

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के 9वें संस्करण के दूसरे एपिसोड में छात्रों को ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के सही इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी है। पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि वे टेक्नोलॉजी के गुलाम न बनें, बल्कि खुद का विस्तार करें। कोयंबटूर के छात्र आदि विक्रम ने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि क्या हमें एआई से डरना चाहिए? उन्होंने पूछा, “आजकल के जमाने में एआई का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। हम देख सकते हैं कि कई कंपनियों में इंसान नहीं, बल्कि एआई कर्मचारी भी होते हैं। तो क्या हमें एआई से डरना चाहिए और हमें अपना फ्यूचर करियर लेने के समय क्या-क्या याद रखना चाहिए?”

 

प्रधानमंत्री मोदी ने छात्र को समझाया कि हर युग में नई टेक्नोलॉजी की चर्चा होती है। पहले यह था कि कंप्यूटर से क्या-क्या बदल जाएगा। इसी तरह यह हर युग की चर्चा का विषय रहा है, लेकिन हमें किसी चीज से डरना नहीं चाहिए। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम उसके गुलाम न बनें और तय करना चाहिए कि मैं ही निर्णायक रहूंगा। वह मेरा मालिक नहीं बन सकता है।”

चिंता जाहिर करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बहुत से बच्चों के लिए मोबाइल उनका मालिक बन चुका है। अगर मोबाइल नहीं है तो वे खाना नहीं खा सकते हैं और टीवी नहीं है तो वे जी नहीं सकते हैं। इसका मतलब स्पष्ट है कि आप उसके गुलाम बन चुके हो।

छात्रों को सलाह देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “एक बार अपने मन में ठान लें कि मैं गुलाम नहीं हूं। हर तकनीक का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर सकते हैं।” उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अगर आप एआई से पूछें कि यह किताब कहां से मिलेगी या इस विषय पर अच्छी किताब कौन सी है, तो हो सकता है कि एआई आपको गाइड करे, तो ये आपके काम आएगा। लेकिन अगर आप एआई से कहें कि मैं नहीं पढ़ूंगा, मुझे एआई ही बता दे कि किताब में अंदर क्या है, तो यह बहुत गड़बड़ है।”

उन्होंने कहा कि हमेशा नेचर ऑफ जॉब बदलना चाहिए। हमें टेक्नोलॉजी को समझना होगा और खुद का विस्तार करना होगा। इसमें आपको टेक्नोलॉजी की ताकत को जोड़ना होगा। अपने कामों में वैल्यू एडिशन करें। अगर यह हुआ तो कितनी भी उत्तम से उत्तम टेक्नोलॉजी आए, हमें उसका लाभ मिलेगा और इससे डरने की जरूरत नहीं है।

 

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