नई दिल्ली : भाजपा के शीर्ष नेता अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री का पदभार संभाला हैं। शाह ने लगातार दूसरी बार गृह मंत्री का पदभार संभाला। वह 2019 से इस विभाग को संभाल रहे हैं। नॉर्थ ब्लॉक में मंत्रालय के कार्यालय पहुंचने पर उनका स्वागत गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और बंडी संजय कुमार के साथ गृह सचिव अजय भल्ला ने किया। इससे पहले दिन में अमित शाह ने राष्ट्रीय राजधानी के चाणक्यपुरी में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी।
शाह ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्होंने उन्हें नवगठित भारतीय जनता पार्टी सरकार में गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री के रूप में फिर से जिम्मेदारी सौंपी है। ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में शाह ने कहा, कि “मुझे फिर से भरोसा जताने और गृह मंत्री तथा सहकारिता मंत्री की भूमिकाएं सौंपने के लिए प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का आभार।
गृह मंत्रालय में अपनी भूमिका के बारे में बोलते हुए शाह ने कहा, “मोदी 3.0 में गृह मंत्रालय सुरक्षा पहलों को तेज और मजबूत करना जारी रखेगा तथा प्रधानमंत्री मोदी के सुरक्षित भारत के सपने को साकार करने के लिए नए दृष्टिकोण पेश करेगा।” सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से किसानों और गांवों को सशक्त बनाने पर शाह ने कहा, “मोदी जी के कुशल नेतृत्व में, सहकारिता मंत्रालय ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण के साथ किसानों और गांवों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद और पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार 59 वर्षीय भाजपा नेता पिछली मोदी सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में कार्यरत थे।
बता दें, अमित शाह ने गुजरात गांधीनगर सीट पर 744716 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। शाह ने कांग्रेस की सोनल पटेल को 266256 वोटों से हराकर 1010972 वोट हासिल किए। 2023 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने गुजरात की गांधीनगर सीट पर 7,44,716 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। शाह ने कांग्रेस की सोनल पटेल को 2,66,256 वोटों से हराकर 10,10,972 वोट हासिल किए। 2019 के लोकसभा चुनाव में शाह ने 5,57,014 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
इस सीट पर पहले लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे भाजपा के दिग्गज नेता काबिज थे। पिछली नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक अनुच्छेद 370 को हटाना था, जिसने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था और उन्होंने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के पारित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसका उद्देश्य पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से सताए गए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करना था।
