Monsoon Retreat From Haryana After Sept 21 : अंबाला। हरियाणा-एनसीआर और दिल्ली में मानसून की विदाई की परिस्थितियां बनने लगी हैं। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार 21 सितंबर के बाद क्षेत्र से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां घटने और मौसम के शुष्क होने के संकेत हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी 19 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की पुष्टि की है तथा अगले कुछ दिनों में राजस्थान के अन्य हिस्सों और पंजाब से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बताई हैं। डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि इस मानसून सीजन में हरियाणा में बारिश का वितरण असमान रहा है। उनके अनुसार 1 जून से 19 सितंबर तक प्रदेश में 317.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य बारिश 409.7 मिलीमीटर रहती है। इस प्रकार बारिश सामान्य से करीब 22 प्रतिशत कम रही। उन्होंने कहा कि मानसून की गतिविधियों में इस बार शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। उन्होंने बताया कि राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू होने के बाद अब उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम के बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। क्षेत्र में प्रतिचक्रवाती परिसंचरण बनने से पश्चिमी एवं शुष्क हवाओं का प्रभाव बढ़ने की संभावना है। इससे वातावरण में नमी कम होगी और दिन तथा रात के तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।
मानसून वापसी के लिए तीन प्रमुख संकेत
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मानसून की वापसी केवल बारिश रुकने से घोषित नहीं की जाती। इसके लिए मुख्य रूप से तीन परिस्थितियों को देखा जाता है। संबंधित क्षेत्र में लगातार पांच दिनों तक वर्षा गतिविधि का समाप्त होना, निचले क्षोभमंडल में प्रतिचक्रवात का स्थापित होना तथा उपग्रह जलवाष्प चित्रों और अन्य मौसम संबंधी आंकड़ों से नमी में पर्याप्त कमी इसके प्रमुख संकेत हैं। डॉ. चंद्रमोहन ने कहा कि वर्तमान मौसम परिस्थितियां इन संकेतों की दिशा में बढ़ रही हैं। मानसून की वापसी के साथ आसमान साफ होने, नमी घटने और शुष्क हवाओं का प्रभाव बढ़ने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार उत्तर अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव से बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिसके आगे चलकर और मजबूत होने का अनुमान है। इससे मध्य भारत में मानसून की वापसी की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि मानसून की वापसी एक साथ पूरे देश से नहीं होती, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों से चरणबद्ध तरीके से होती है। पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हिस्से सबसे पहले मानसून से बाहर आते हैं, जबकि देश के दक्षिणी हिस्सों से इसकी पूरी वापसी बाद में होती है। IMD के अनुसार पूरे देश से मानसून की वापसी के लिए स्थानिक निरंतरता, नमी में कमी और लगातार शुष्क मौसम जैसी परिस्थितियों को देखा जाता है। डॉ. चंद्रमोहन, नोडल अधिकारी, पर्यावरण क्लब, राजकीय महाविद्यालय नारनौल ने कहा कि हरियाणा-एनसीआर में मानसून अब अंतिम पड़ाव पर है और आगामी दिनों में मौसम में बदलाव के साथ बारिश की गतिविधियों में कमी देखने को मिल सकती है।
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