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देश में मार्च से जून तक लू लगने के 7,000 से अधिक मामले सामने आए, 14 मौतें हुई दर्ज

नई दिल्ली: देश में इस वर्ष एक मार्च से 24 जून के बीच लू लगने के 7,192 संदिग्ध मामले सामने आए और मात्र 14 मौतें दर्ज की गईं। यह जानकारी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त आंकड़े से मिली। देश में 2024 में भीषण गर्मी के कारण लू लगने के लगभग 48,000 मामले और 159 मौतें दर्ज की गई थीं। 2024 का साल 1901 के बाद से भारत में दर्ज किया गया सबसे गर्म वर्ष था। सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य आंध्र प्रदेश रहा जहां इस अवधि के दौरान लू लगने के कुल संदिग्ध मामलों में से आधे से अधिक यानी 4,055 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए। वहीं राजस्थान में 373 मामले दर्ज किए गए, इसके बाद ओडिशा (350), तेलंगाना (348) और मध्य प्रदेश (297) का स्थान रहा।

इतनी बड़ी संख्या के बावजूद, सैकड़ों संदिग्ध मामलों वाले कई राज्यों ने किसी भी मौत की पुष्टि नहीं की है। एनसीडीसी के आंकड़े एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत जुटाए जाते हैं और ये अस्पतालों द्वारा बताए गए मामलों पर आधारित होते हैं। इसका मतलब यह है कि जो मौतें अस्पतालों के बाहर होती हैं या जिन्हें सही ढंग से गर्मी से जुड़ी बीमारी के रूप में पहचाना नहीं जाता वे अक्सर दर्ज ही नहीं हो पातीं। पड़ताल से पता चला कि भारत में गर्मी से जुड़ी बीमारी और मौत के आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया सुव्यवस्थित नहीं है और अलग-अलग एजैंसियां इस विषय पर अलग-अलग आंकड़े देती हैं। एनसीडीसी ने 2015-2022 में गर्मी से संबंधित 3,812 मौतें दर्ज की, जबकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने 8,171 और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 3,436 मौतें दर्ज की।

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