चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस की गैर मौजूदगी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के समर्थन में सरकारी प्रस्ताव पेश किया, जो ध्वनि मत से पारित हो गया।
सदन में करनी चाहिए चर्चा : जरनैल
सोमवार को कांग्रेस विधायक एक दिन के सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। क्रॉस वोटिंग करने के आरोपी जरनैल सिंह, शैली चौधरी और रेणुबाला सदन में मौजूद रहे। तीनों कांग्रेस विधायक कई बार सदन से बाहर निकले और भीतर आए। कांग्रेस के जरनैल सिंह बोले कि अगर कांग्रेस को महिलाओं के हितों की चिंता है तो उन्हें समानांतर सदन चलाने के बजाय विशेष सत्र में ही बैठकर महिलाओं के हितों पर चर्चा करनी चाहिए।
नहीं था ये कोई राजनीतिक प्रस्ताव : मंत्री
नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी और साढौरा की विधायक रेणुबाला नारी शक्ति वंदन संशोधन बिल पर कुछ नहीं बोली। इस दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने तीनों कांग्रेस विधायकों की ओर से सदन में मौजूद रहने का साहस करने पर उनकी सराहना की। संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और सहकारिता मंत्री डॉॅ. अरविंद शर्मा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के समर्थन में चर्चा कोई राजनीतिक प्रस्ताव नहीं है।
महिला आरक्षण बिल पहले ही हो चुका पास : इनेलो
इनेलो के विधायकों अर्जुन चौटाला और आदित्य देवीलाल ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। पंचायत एवं विकास मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कांग्रेस विधायकों के बहिष्कार पर कहा कि जब भी देश और महिला हित की बात आती है, कांग्रेस सदन छोड़कर भाग जाती है। इनेलो विधायकों ने कांग्रेस विधायकों की तरह कहा कि जब लोकसभा और राज्यसभा में साल 2023 में महिला आरक्षण बिल पास हो चुका है तो उसे लागू किया जाना चाहिए। नये परिसीमन के हिसाब से नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को लाने का कोई औचित्य नहीं है।
श्रुति चौधरी ने की प्रधानमंत्री की तारीफ
महिला और बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने महिलाओं को राजनीति में आरक्षण देने के प्रधानमंत्री के प्रयासों की दिल खोलकर तारीफ की और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा, विधायक जगमोहन आनंद, कृष्णा गहलाव, सावित्री जिंदल, पंडित मूलचंद शर्मा, भगवान दास कबीरपंथी और शक्ति रानी शर्मा ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि साल 2029 से ही प्रधानमंत्री महिलाओं को आरक्षण देना चाहते थे, मगर कांग्रेस समेत इंडी गठबंधन के नेताओं को महिलाओं की राजनीतिक व सामाजिक प्रगति रास नहीं आई है।
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