इंटरनेशनल डेस्क: करीब पांच दशकों के लंबे इंतजार के बाद इंसान एक बार फिर चांद की दिशा में बढ़ चुका है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का मानव मिशन आर्टेमिस II सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया है। भारतीय समय के अनुसार, गुरुवार सुबह 4:05 बजे फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से इस मिशन ने उड़ान भरी। इस लॉन्च के साथ ही अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।

इस मिशन में चार अनुभवी अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर, रीड वाइसमैन और जेरेमी हैंसन शामिल हैं। इन्हें अत्याधुनिक और शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया है। मिशन की कुल अवधि लगभग 10 दिन की होगी, जिसमें ये अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से करीब 4.06 लाख किलोमीटर की दूरी तक पहुंचेंगे। यह दूरी अब तक की किसी भी मानव अंतरिक्ष यात्रा से अधिक मानी जा रही है।
हालांकि इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसकी परिक्रमा करेंगे। यह एक परीक्षण मिशन है, जिसका मुख्य उद्देश्य भविष्य के चंद्र अभियानों की तैयारी करना है। इस दौरान कई नई तकनीकों और मानव क्षमताओं की जांच की जाएगी, जो आगे चलकर चांद पर मानव की स्थायी उपस्थिति स्थापित करने में मदद करेंगी।
NASA के अनुसार, यह मिशन केवल एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं है, बल्कि यह डीप स्पेस में मानव शरीर की असली परीक्षा भी है। साल 1972 के बाद पहली बार इंसान पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से बाहर जाएगा और कॉस्मिक रेडिएशन जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में होने वाले हर छोटे-बड़े बदलाव को ध्यानपूर्वक रिकॉर्ड किया जाएगा।

इस मिशन का एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग ‘ऑर्गन-ऑन-ए-चिप’ तकनीक है। इसके तहत अंतरिक्ष यात्रियों के रक्त से कोशिकाएं लेकर माइक्रोचिप पर विकसित की गई हैं। इनमें से एक चिप को अंतरिक्ष में भेजा गया है और दूसरी को पृथ्वी पर रखा गया है। मिशन पूरा होने के बाद दोनों चिप्स की तुलना की जाएगी, ताकि यह समझा जा सके कि डीएनए, टेलीमीयर की लंबाई और अन्य जैविक संकेतकों में अंतरिक्ष के प्रभाव से क्या बदलाव आते हैं। यह प्रयोग भविष्य में मंगल जैसे लंबी दूरी के मिशनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
इस मिशन की लॉन्चिंग कई बार टाली गई थी। शुरुआत में इसे फरवरी 2026 में लॉन्च करने की योजना थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं और ईंधन परीक्षण में आई दिक्कतों के कारण इसे आगे बढ़ाना पड़ा। मार्च में भी लॉन्च की तैयारी हुई, लेकिन अंततः सभी जरूरी परीक्षण और तैयारियों के बाद अप्रैल 2026 में इसे सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
Artemis कार्यक्रम के तहत यह मिशन आने वाले समय में चांद पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। साथ ही यह मिशन भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव को पहुंचाने के लक्ष्य को भी मजबूती देता है।
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