नई दिल्ली (आकाश द्विवेदी): भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के अंतर्गत समुद्री सीमा पर अपना दबदबा स्थापित करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हवाई, सतही या पनडुब्बी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। नेवल ऑपरेशंस के महानिदेशक वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारतीय नौसेना आज एक संयुक्त नेटवर्क आधारित ताकत है, जो सभी क्षेत्रों से आने वाले खतरों को एकसाथ संबोधित कर सकती है। उन्होंने कहा कि नौसेना की सबसे बड़ी ताकत उसका अत्याधुनिक सेंसर सिस्टम है, जो पूरी तरह से समन्वित कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा है। इस तकनीकी संगठित ढांचे की मदद से नौसेना को समुद्री क्षेत्र में लगातार निगरानी, खतरे की पहचान और उसे निष्क्रिय करने की क्षमता प्राप्त होती है।
वाइस एडमिरल प्रमोद ने बताया कि भारतीय नौसेना की एयर डिफेंस प्रणाली लेयर्ड यानी परतदार है, जो कई स्तरों पर सुरक्षा प्रदान करती है। इसमें ड्रोन, फाइटर जेट, हाई-स्पीड मिसाइलों और सर्विलांस एयरक्राफ्ट जैसे सभी हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जाता है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि वर्तमान टकराव की स्थिति में भारतीय विमानवाहक पोत और उसके साथ तैनात मिग-29के लड़ाकू विमानों एवं एयरबोर्न अर्ली वार्निंग हेलीकॉप्टरों की तैनाती ने किसी भी संदिग्ध या शत्रु विमान को कैरियर बैटल ग्रुप के सैकड़ों किलोमीटर के दायरे में आने से रोके रखा। उन्होंने बताया कि हमारे पायलट अत्यधिक प्रशिक्षित हैं और दिन-रात किसी भी परिस्थिति में ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं।
प्रमोद ने यह भी कहा कि पुलवामा हमले के बाद भारतीय नौसेना ने एक जटिल युद्ध-परिस्थिति में अपनी मिसाइल और वायु-रक्षा प्रणाली का सफल परीक्षण किया था, जिससे यह साबित हुआ कि हम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह दावा किया कि भारतीय नौसेना की ताकतवर कैरियर बैटल ग्रुप ने पाकिस्तान की नौसेना और वायुसेना को मकरान तट तक सीमित कर दिया और उन्हें समुद्री क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सक्रियता से वंचित रखा। प्रमोद ने दो टूक कहा, “भारतीय नौसेना की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर हम चाहें, तो कहीं भी और कभी भी दुश्मन पर प्रहार कर सकते हैं।”
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