नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश से हथियारबंद नक्सलवाद का खात्म हो चुका है लेकिन ‘दिमागी नक्सली’ अब भी मौजूद हैं और ऐसे लोग अवसर की तलाश में अराजकता की राह खोज रहे हैं इसलिए उनकी पहचान करना और उन्हें अलग-थलग कर युवा पीढ़ी को विकसित राष्ट्र के निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना होगा। मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, वर्षों तक देश की सत्ता के गलियारों में माओवादी सोच के लोग अपनी जगह बनाकर बैठे थे।
सरकार की कमेटियों में सलाहकार के रूप में माओवादियों ने देश को प्रभावित किया और उनकी विचारधारा ने नीतियों को भी प्रभावित किया है। जंगलों में हथियारबंद नक्सलियों के खात्मे और इस संकट से देश को मुक्ति दिलाने में देश को सफलता मिली है। इस सफलता से हथियारबंद नक्सली तो चले गए, लेकिन ‘दिमाग नक्सली’ और ‘हत्यारी नक्सली’ अभी मौजूद है। ऐसे लोग मौके की तलाश में अराजकता की राह खोज रहे हैं और समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश की खुशहाली के लिए इन ‘नक्सली दिमाग’ वाले लोगों की पहचान करना आवश्यक है। पहचान के बाद इनको अलग-थलग करना ही होगा और राष्ट्र की प्रगति के लिए देश की युवा पीढ़ी को विकसित राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में दशकों से चली आ रही चुनौतियों को समाप्त करना जरूरी है।
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