Last Updated: October 7, 2026

Dainik Savera Times Logo

NCDRC ने ICICI बैंक को संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज खोने पर मुआवजा देने का दिया आदेश

September 6, 2023

NCDRC ने ICICI बैंक को संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज खोने पर मुआवजा देने का दिया आदेश

नई दिल्ली: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने आईसीआईसीआई बैंक को एक शिकायतकर्ता की मूल संपत्ति के स्वामित्व दस्तावेज खोने के लिए 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।शिकायत मनोज मधुसूदनन ने अपने वकील श्वेतांक शांतनु के माध्यम से दायर की थी और सेवाओं में कमी के लिए मुआवजे की मांग की थी।ये दस्तावेज़ आवास ऋण के लिए सुरक्षा के रूप में बैंक में जमा किए गए थे।

शिकायत के मुताबिक, आईसीआईसीआई बैंक ने अप्रैल 2016 में बेंगलुरु में 1.86 करोड़ रुपये का हाउसिंग लोन मंजूर किया था।विक्रय विलेख के निष्पादन के बाद बैंक ने पंजीकृत विक्रय विलेख और कब्ज़ा प्रमाणपत्र सहित विभिन्न मूल संपत्ति दस्तावेजों को अपने पास रख लिया।चूंकि बैंक ने इन दस्तावेजों की स्कैन या सच्ची प्रतियां उपलब्ध नहीं कराईं, मधुसूदनन ने जून 2016 में शिकायत दर्ज की।जवाब में बैंक ने उन्हें सूचित किया कि दस्तावेज़ एक कूरियर कंपनी द्वारा बेंगलुरु से हैदराबाद में केंद्रीय भंडारण सुविधा तक ले जाते समय खो गए थे। मधुसूदनन ने मामले को बैंकिंग लोकपाल तक पहुंचाया, जिसने सितंबर 2016 में बैंक को खोए हुए दस्तावेजों की डुप्लिकेट कॉपी जारी करने, नुकसान के बारे में एक सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित करने और शिकायतकर्ता को सेवा में कमी के लिए 25,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

समाधान से असंतुष्ट, मधुसूदनन ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि बैंक बेहद लापरवाह था और दस्तावेजों की प्रतियां मूल दस्तावेजों की पवित्रता की जगह नहीं ले सकतीं। उन्होंने मानसिक परेशानी और नुकसान के लिए 5 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा। एनसीडीआरसी ने सेवा में कमी और भविष्य में होने वाले नुकसान के खिलाफ क्षतिपूर्त िके आधार पर मुआवजे के दावे की वैधता को मान्यता दी। इसमें कहा गया कि बैंक देनदारी को कूरियर कंपनी पर स्थानांतरित नहीं कर सकता। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि साक्ष्य सेवा में कमी के दावे का समर्थन करते हैं और इसने आईसीआईसीआई बैंक को आवास ऋण के लिए बिक्री विलेख पंजीकरण के दौरान सुरक्षा के रूप में रखे गए दस्तावेजों की सभी पुनर्नर्मिति और विधिवत प्रमाणित प्रतियां अपने खर्च पर प्राप्त करने का आदेश दिया।इसके अलावा, बैंक को सेवा में कमी के मुआवजे के रूप में 25 लाख रुपये और मुकदमेबाजी लागत के रूप में 50,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें