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Apple और Facebook की बिगड़ी बनाने वाले थे नीम करौली बाबा

Neem Karoli Baba Apple and Facebook.

Neem Karoli Baba Apple and Facebook.

Neem Karoli Baba Apple and Facebook : बाबा नीम करौली के चमत्कार और कथाएं किसी सीमा की मोहताज नहीं, बल्कि सात समुंदर पार तक है। उनके भक्तों में एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग और हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया के नाम शामिल हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से माथा टेकने वालों की बिगड़ी बन जाती है। 15 जून काे बाबा की जयंती पर आयोजित होने वाले महोत्सव का विशेष प्रसाद ग्रहण करने के लिए देश-दुनिया भर से हजारों-लाखों भक्त पहुंचते हैं।

एप्पल कंपनी का नाम मिला, बाबा नहीं

एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स 1974 से 1976 के बीच भारत भ्रमण पर निकले। उन्हें तलाश थी गुरु की और वे यहां आध्यात्मिक यात्रा पर आए थे। स्टीव पहले हरिद्वार पहुंचे। यहां कुछ दिन रुकने के बाद कैंचीधाम गए। जब वे नीम करौली बाबा के आश्रम में आए तब उन्हें पता लगा कि बाबा समाधि ले चुके हैं। कहा जाता है कि एप्पल के लोगों का आइडिया स्टीव को बाबा के आश्रम से ही मिला। नीम करौली बाबा को सेब पसंद थे और वह बड़े ही चाव से सेब खाया करते थे। इसी वजह से स्टीव ने अपनी कंपनी के लोगों के लिए कटे एप्पल को चुना।

मार्क जुकरवर्ग ने पीएम मोदी से किया था जिक्र

27 सितंबर 2015 को जब भारतीय प्रधानमंत्री मोदी फेसबुक के मुख्यालय में थे तो जुकरबर्ग ने पीएम को भारत भ्रमण की बात बताई। उन्होंने कहा कि जब वे इस संशय में थे कि फेसबुक को बेचा जाए या नहीं, तब एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने इन्हें भारत के एक मंदिर में जाने की सलाह दी। जुकरबर्ग ने बताया था कि वे एक महीना भारत में रहे। इस दौरान उस मंदिर में भी गए। जुकरबर्ग आए तो एक दिन के लिए थे, लेकिन मौसम खराब हो जाने के कारण वह यहां दो दिन रुके थे। मार्क जुकरबर्ग ने बताया कि उस समय वे बहुत निराश थे। फेसबुक बेचने तक का मन बना चुका था। जुकरबर्ग मानते हैं कि भारत में मिली अध्यात्मिक शांति के बाद उन्हें फेसबुक को नए मुकाम पर ले जाने की ऊर्जा मिली।

जब हिंदू बन गई हॉलीवुड अदाकारा

अपनी फिल्म ‘ईट, प्रे, लव’ की शूटिंग के लिए भारत आईं जूलिया रॉबर्ट ने 2009 में हिंदू धर्म अपना लिया। ऑस्कर विजेता हॉलीवुड की इस अदाकारा ने खुलासा किया कि वह नीम करौली बाबा की तस्वीर से इतना प्रभावित हुई कि उन्होंने हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला कर डाला। जूलिया इन दिनों हिन्दू धर्म का पालन कर रही हैं। वो अपने पति और तीनों बच्चों के साथ मंदिरों में प्रार्थना करने भी जाती हैं। जूलिया भारत में घर खरीदकर बसना चाहती हैं। घर खरीदने के अलावा जूलिया की एक तमन्नाथ और है वह है हिंदुस्तान की जुबान हिन्दी सीखने की। जूलिया चाहती हैं कि वह हिन्दी बोलने में पारंगत हो जाए।

11 सितंबर 1973 को ले ली महासमाधि

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के गांव अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा एक गांव नीम करौली में कठिन तप करके नीम करौली बन गए। बाबा जन्म से ही संत थे। जहां भी जाते यज्ञ कराते और भंडारा लगाते। यज्ञ देवताओं के लिए और भंडारा सामान्य मनुष्यों के लिए। उन्होंने तमाम हनुमान मंदिर स्थापित कराए। निर्वाण से पूर्व दो आश्रम भी बनवाए। पहला आश्रम कैंची तो दूसरा वृंदावन में। बाबा ने महासमाधि के लिए वृंदावन को चुना। नौ सितंबर 1973 को नीम करौली महाराज ने कैंची से आगरा के लिए प्रस्थान किया। यह उनकी कैंची की अंतिम यात्रा थी। वह इसका संकेत भी दे गए। 10 सितंबर को आगरा से वृंदावन रवाना हुए, जहां 11 सितंबर को महासमाधि ली।

मान सिंह रहे हैं बाबा के सारथी

बाबा नीम करौली महाराज के अनन्य अनुयायियों में से एक हैं सरदार मान सिंह। उन्हें बाबा का सारथी कहा जाता था। मान सिंह 78 बसंत पार कर चुके हैं, मगर कैंची धाम के मेले में पहुंच बाबा का ध्यान लगाने जरूर आते हैं। राजेंद्र नगर गली नंबर चार हल्द्वानी निवासी सरदार मान सिंह टैक्सी चालक रहे। वर्ष 1969 की बात है जब वह हल्द्वानी से अल्मोड़ा के लिए टैक्सी चलाते थे। एक बार अल्मोड़ा से सवारियां लेकर हल्द्वानी लौट रहे थे। देखा कि हाईवे पर कैंची के समीप भीड़ लगी है। वाहन रोका, उतरे और देखा कि लोग बाबा नीम करौली के चरण छू रहे। वह बाबा के आभामंडल से इतने प्रभावित हुए कि अपनी सवारियां दूसरे वाहन से गंतव्य को भेजी। खुद बाबा के पास जाकर बैठ गए। फिर कहीं नहीं गए।

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