Last Updated: October 21, 2026

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भारत के खिलाफ टिप्पणी करके फंसे नेपाल के PM, देनी पड़ी सफाई

June 1, 2026

भारत के खिलाफ टिप्पणी करके फंसे नेपाल के PM, देनी पड़ी सफाई

काठमांडु। एक अर्से से भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद एक बार फिर प्रकाश में आ गया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में पहली बार बोलते हुए कहा कि केवल भारत ने ही नहीं, हमने भी उनकी जमीन पर कब्जा किया है। जब इस बयान पर विपक्ष ने सवाल पूछे तो विदेश मंत्रालय को बयान वापस लेना पड़ा।

बातचीत से समाधान की बात भी कही

अपने भाषण के दौरान उन्होंने भारत और नेपाल के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा के नाम पर सीमा विवाद का जिक्र भी किया। उन्होंने विवाद के समाधान के लिए दोनों देशों को मित्रतापूर्ण बातचीत की सलाह दी, लेकिन इस दौरान दिया उनका एक बयान चर्चा का विषय बन गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें एक ऐसी जानकारी मिली, जिसने उन्हें हैरान कर दिया। उनके अनुसार, केवल भारत ने ही नेपाली क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारतीय भूमि पर कब्जा किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद से तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए और फिर मित्र देशों की तरह बैठकर इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए।

विपक्षी सांसदों ने जताई आपत्ति

बालेन शाह ने संसद को बताया कि नेपाल ने सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों को चीन और ब्रिटेन के समक्ष भी उठाया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को इस पर रुचि लेनी चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा उसी समय का है, जब उन्होंने देश छोड़ा था। ब्रिटेन का उल्लेख उन्होंने क्षेत्र में उसके औपनिवेशिक इतिहास के संदर्भ में किया। प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर नेपाल की राजनीति में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली। नेपाली कांग्रेस की बसना थापा और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के रमेश मल्ला समेत कई विपक्षी सांसदों ने बयान पर आपत्ति जताई।

सांसद बोले-या प्रमाण दें या बयान वापस लें

उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री या तो अपने दावे के समर्थन में प्रमाण पेश करें या फिर बयान वापस लें। नेपाल-भारत सीमा मामलों के विशेषज्ञ और भूगोलवेत्ता बुद्धि नारायण श्रेष्ठ ने प्रधानमंत्री के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किए जाने का कोई उदाहरण नहीं है। उन्होंने माना कि कुछ सीमावर्ती इलाकों में सीमा स्तंभों के गायब होने और लोगों के आवागमन के कारण दोनों देशों के किसानों ने एक-दूसरे की जमीन का उपयोग किया है, लेकिन इसे अतिक्रमण नहीं कहा जा सकता। भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत नीलाम्बर आचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास नेपाल की ओर से भारतीय भूमि पर अतिक्रमण किए जाने संबंधी कोई ठोस जानकारी नहीं है।

सीमा पर सुलझ चुके हैं अधिकतर विवाद

उन्होंने बताया कि भारत और नेपाल के बीच लगभग 97 प्रतिशत सीमा विवाद पहले ही सुलझाए जा चुके हैं। कुछ इलाकों में सीमा स्तंभों के अभाव के कारण भूमि उपयोग में ओवरलैप हो सकता है, लेकिन नेपाल की ओर से भारतीय क्षेत्र पर कब्जे का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। प्रधानमंत्री के बयान के कुछ घंटों बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री का आशय यह नहीं था कि नेपाल ने आधिकारिक तौर पर भारतीय भूमि पर कब्जा कर लिया है।

विदेश मंत्रालय ने दी ये सफाई

सफाई में कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं जहां भारतीय नागरिकों द्वारा उपयोग की जा रही भूमि नेपाल की सीमा में आती हो और इसी तरह कुछ नेपाली नागरिक भारतीय क्षेत्र में स्थित भूमि का उपयोग कर रहे हों। मंत्रालय ने इसे ‘सीमा पार भूमि उपयोग’ और ‘क्रॉस-बॉर्डर ऑक्युपेशन’ से जुड़ा मामला बताया। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों की तकनीकी टीमें और सीमा संबंधी तंत्र सीमा स्तंभों की मरम्मत, निर्माण और दशगजा क्षेत्रों से जुड़े आंकड़े एकत्र करने का काम लगातार कर रहे हैं।

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