नई दिल्लीः 5 सितंबर को देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों और देश के अन्य शिक्षकों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके मानसिक विकास, खेलकूद, रचनात्मकता और सुरक्षा पर भी ध्यान देने की बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज बच्चों में स्क्रीन टाइम एक बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सोशल मीडिया और वीडियो गेम के कारण कई बच्चे लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताते हैं। धीरे-धीरे यह आदत एडिक्शन यानी लत का रूप ले सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल स्क्रीन से दूर करने की बात करने के बजाय उन्हें ऐसी गतिविधियों से जोड़ना चाहिए, जिनमें उनकी रुचि पैदा हो।
बच्चों को खेलकूद से जोड़ें
प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों को मैदान में जाकर खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यहां खेलकूद का मतलब वीडियो गेम नहीं, बल्कि मैदान में खेले जाने वाले वास्तविक खेल हैं। अगर बच्चा क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, दौड़ या किसी अन्य खेल में रुचि लेने लगे, तो उसका ध्यान धीरे-धीरे मोबाइल और वीडियो गेम से हट सकता है। खेल बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ-साथ उनमें टीम भावना, अनुशासन और आत्मविश्वास भी पैदा करते हैं।
बच्चों में रचनात्मकता बढ़ाने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों को ज्यादा से ज्यादा रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना चाहिए। उन्हें केवल किताबों और पढ़ाई तक सीमित नहीं रखना चाहिए। बच्चों को चित्रकला, संगीत, लेखन, विज्ञान से जुड़े प्रयोग, नई चीजें बनाने, कहानी कहने और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों में शामिल किया जा सकता है। ऐसी गतिविधियां बच्चों को अपनी सोच और कल्पना का इस्तेमाल करने का अवसर देती हैं। इसलिए स्कूलों में इस तरह के कार्यक्रमों को केवल कभी-कभार नहीं, बल्कि बच्चों की नियमित आदत का हिस्सा बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
ड्रग्स के खतरे को लेकर शिक्षकों की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने नशीली दवाओं यानी ड्रग्स के बढ़ते खतरे को लेकर भी शिक्षकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि ड्रग्स की समस्या को केवल कुछ बड़े शहरों या विश्वविद्यालयों तक सीमित समझना सही नहीं है। कई बार बच्चों को यह पता भी नहीं होता कि उनके आसपास क्या हो रहा है। कोई व्यक्ति उन्हें गलत चीज देकर नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार और उनकी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।
#TeachersDay is about appreciating the strong contribution of teachers to our society. It is also a day to pay homage to Dr. S. Radhakrishnan.
Here is what happened when the National Teachers’ Awards winners were invited to 7, LKM yesterday…. pic.twitter.com/LtXTvHiQoQ
— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2026
बच्चों में बदलाव को पहचानें
पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षक बच्चों को बहुत करीब से देखते हैं। इसलिए अगर किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव आता है, तो शिक्षक को उसे गंभीरता से लेना चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर कोई बच्चा अचानक बहुत चुप रहने लगे, पढ़ाई या दोस्तों से दूर होने लगे, उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई दे या वह पहले की गतिविधियों में रुचि लेना बंद कर दे, तो शिक्षक को उसके बारे में संवेदनशीलता से समझने की कोशिश करनी चाहिए। शिक्षकों को बच्चों से केवल पढ़ाई के बारे में नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी और परेशानियों के बारे में भी बातचीत करनी चाहिए।
शिक्षक केवल किताब और सिलेबस तक सीमित न रहें
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज के समय में शिक्षक की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि उन्हें केवल किताबों और सिलेबस तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बच्चों की वास्तविक जिंदगी को समझना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है। शिक्षक को यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि बच्चा किन परिस्थितियों से गुजर रहा है, उसके सामने क्या समस्याएं हैं और उसकी रुचियां क्या हैं।
बच्चों के जीवन में शामिल होना जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों की जिंदगी में और अधिक जुड़ना होगा। इसका मतलब यह है कि शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने वाले व्यक्ति न रहें, बल्कि बच्चों के मार्गदर्शक और सहयोगी भी बनें। जब शिक्षक बच्चों को समझेंगे, उनसे बात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे, तब वे कई गलत आदतों और परेशानियों से बच्चों को बचाने में मदद कर सकते हैं।
“बचपन मरने नहीं देना चाहिए”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में एक महत्वपूर्ण बात कही कि बच्चों का बचपन मरने नहीं देना चाहिए। आज पढ़ाई का दबाव, मोबाइल, इंटरनेट और दूसरी चीजों के कारण कई बार बच्चे बचपन की सामान्य खुशियों और गतिविधियों से दूर हो जाते हैं। बच्चों को खेलने, हंसने, सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और अपनी पसंद की गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलना चाहिए।
शिक्षक बचपन को बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं
पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों के भीतर बचपन को बनाए रखने में शिक्षक की बहुत बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक का काम केवल पढ़ाना नहीं है। शिक्षक को ऐसा माहौल भी बनाना चाहिए, जिसमें बच्चा अपनी जिज्ञासा, कल्पना और रचनात्मकता को बनाए रख सके। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक के भीतर भी बचपन की भावना बनी रहनी चाहिए। अगर शिक्षक खुद उत्साह, जिज्ञासा और सकारात्मक सोच के साथ बच्चों के साथ जुड़ेंगे, तो बच्चे भी बेहतर तरीके से सीख पाएंगे।
पूरे शिक्षा जगत के लिए संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी यह बात केवल सामने बैठे शिक्षकों के लिए नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा जगत के लिए है। आज शिक्षा को केवल किताब, परीक्षा और सिलेबस तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के पूरे व्यक्तित्व और जीवन से जोड़ने की जरूरत है।
शिक्षकों, स्कूलों और अभिभावकों को मिलकर यह प्रयास करना चाहिए कि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ खेल, रचनात्मकता, अच्छे संस्कार और स्वस्थ जीवनशैली से भी जुड़े रहें।
शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं
अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों और देश के सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शिक्षकों के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने और उनके बचपन को सुरक्षित रखने में शिक्षक की भूमिका बहुत बड़ी है।

