Operation Sindoor : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के मन में बदले की आग जल रही थी। बिना परिणाम की चिंता किए भारतीय सेना के जवानों ने पाकिस्तान को घुटने टिका दिए। ऑपरेशन सिंदूर किसी भी पारंपरिक अभियान से अलग था, क्योंकि सेना दुश्मन की अगली चाल को लेकर अनिश्चित थी, जिससे यह शतरंज के खेल जैसा लग रहा था। फिर भी, भारत ने निर्णायक शह और मात देकर जीत हासिल की, थल सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, साथ ही उन्होंने इस तरह के दृष्टिकोण में शामिल जोखिमों को भी स्वीकार किया।
सेना प्रमुख ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में, हमने शतरंज खेला… हमें नहीं पता था कि दुश्मन की अगली चाल क्या होगी और हम क्या करने वाले हैं। इसे ग्रेज़ोन कहते हैं। ग्रेज़ोन का मतलब है कि हम पारंपरिक ऑपरेशन नहीं कर रहे हैं। हम जो कर रहे हैं वह पारंपरिक ऑपरेशन से बस थोड़ा सा कम है… हम शतरंज की चालें चल रहे थे, और वह (दुश्मन) भी शतरंज की चालें चल रहा था।”
राजनीतिक संकल्प और रणनीतिक स्पष्टता से प्रेरित
आईआईटी मद्रास में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, “कहीं हम उन्हें शह और मात दे रहे थे, तो कहीं हम अपनी जान गंवाने का जोखिम उठाकर भी उन्हें मात देने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन यही तो जीवन है।”
सेना प्रमुख ने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में 7 मई को शुरू किया गया आतंकवाद-रोधी अभियान, जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर में 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी, सरकार के स्तर पर राजनीतिक संकल्प और रणनीतिक स्पष्टता से प्रेरित था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री के साथ उच्च-स्तरीय बैठकों के दौरान सेना को ‘खुली छूट’ देने के फैसले की सराहना की।
बयानबाजी प्रबंधन की आलोचना
द्विवेदी ने कार्यक्रम में कहा, “(23 अप्रैल को) हम सब बैठे। यह पहली बार था जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘बस, बहुत हो गया’। तीनों सेना प्रमुख इस बात पर बिल्कुल स्पष्ट थे कि कुछ तो करना ही होगा। खुली छूट दी गई, ‘आप तय करें कि क्या करना है।’ इस तरह का आत्मविश्वास, राजनीतिक दिशा और राजनीतिक स्पष्टता हमने पहली बार देखी।”
उन्होंने पाकिस्तान के उस बयानबाजी प्रबंधन की आलोचना की, जिसमें वह खुद को संघर्ष में विजेता बता रहा है, और सरकार द्वारा अपने सेना प्रमुख असीम मुनीर को पाँच सितारा जनरल और फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत करने के फैसले का हवाला दिया।
जीत हमारे दिमाग में होती है
सेना प्रमुख ने कहा, “नैरेटिव मैनेजमेंट सिस्टम एक ऐसी चीज़ है जिसका हमें बड़े पैमाने पर एहसास होता है क्योंकि जीत हमारे दिमाग में होती है। यह हमेशा हमारे दिमाग में रहती है। अगर आप किसी पाकिस्तानी से पूछें कि आप हारे या जीते, तो वह कहेगा, ‘सेना प्रमुख फील्ड मार्शल बन गए हैं। हम जीते ही होंगे, इसीलिए वह फील्ड मार्शल बने हैं।'”
#WATCH | IIT मद्रास में एक संबोधन के दौरान, थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “…अगर आप किसी पाकिस्तानी से पूछें कि आप हारे या जीते, तो वह कहेगा कि मेरा सेनापति फील्ड मार्शल बन गया है। हम ही जीते होंगे, इसीलिए वह फील्ड मार्शल बना है…” (09.08)
(सोर्स: ADGPI) pic.twitter.com/oeKanZWm7k
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 9, 2025
ऑपरेशन सिंदूर- पूरे देश को जोड़ता है…
इस मिशन का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखने पर जनरल द्विवेदी ने कहा कि इसने पूरे देश को प्रेरित किया। उन्होंने आगे कहा, “यह महत्वपूर्ण है कि कैसे एक छोटा सा नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पूरे देश को जोड़ता है… यह एक ऐसी चीज़ है जिसने पूरे देश को प्रेरित किया… यही वजह है कि पूरा देश कह रहा था कि आपने इसे क्यों रोक दिया? यह सवाल पूछा जा रहा था और इसका भरपूर जवाब दिया गया है।”
सोचे-समझे हमले
ऑपरेशन सिंदूर, भारत द्वारा शुरू किया गया एक लक्षित सैन्य अभियान था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढाँचों और शिविरों पर सटीक हमले किए गए। सरकार से पूरी छूट मिलने के बाद, भारतीय सशस्त्र बलों ने नौ विशिष्ट लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए हवाई और मिसाइल हमलों का संयोजन किया।
जबकि भारत ने कहा कि हमले केंद्रित, सोचे-समझे और गैर-बढ़ाने वाले थे, पाकिस्तान ने जवाबी ड्रोन और मिसाइल हमलों से जवाब दिया, जिन्हें भारत की वायु रक्षा प्रणालियों ने प्रभावी ढंग से निष्प्रभावी कर दिया।
भारत की सैन्य कार्रवाई
इस मिशन को व्यापक रूप से भारत की सैन्य और मनोवैज्ञानिक दोनों ही दृष्टि से एक जीत माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, इस अभियान ने भारत की उच्च-सटीक, समन्वित सैन्य कार्रवाई की क्षमता को प्रदर्शित किया, जिसने आतंकवादी ढाँचे को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया और राज्य-प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध निवारक शक्ति बहाल की।

