Last Updated: September 23, 2026

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‘विपक्ष चुनाव हारने के बाद संस्थाओं पर सवाल उठा रहा’, संबित पात्रा का पलटवार

September 23, 2026

‘विपक्ष चुनाव हारने के बाद संस्थाओं पर सवाल उठा रहा’, संबित पात्रा का पलटवार

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्षी दलों पर चुनाव आयोग की छवि खराब करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद विपक्षी दल लगातार चुनाव हारते गए और अब संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर लोकतंत्र को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

EC पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रहा

संबित पात्रा ने कहा कि आज कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग (ईसीआई) को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन वे खुद ही अपने लगाए आरोपों के जाल में फंस गए। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को तानाशाही बताने की कोशिश कर रहा है, जबकि चुनाव आयोग पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रहा है।

उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि उसके पहले ही पैराग्राफ में स्पष्ट लिखा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का फैसला सभी आधिकारिक और लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से लिया गया। तीनों चुनाव आयुक्त इस निर्णय पर एकमत थे और उनके बीच कोई मतभेद नहीं था।

यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यदि देश के तीनों चुनाव आयुक्त आपस में संवाद और पत्राचार करते हैं, तो यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सहित भारत की कोई भी संवैधानिक संस्था किसी तानाशाही के अधीन नहीं है, बल्कि संविधान के दायरे में लोकतांत्रिक तरीके से अपने दायित्व निभा रही है।

विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पात्रा ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जिन 20 विधानसभा सीटों पर सबसे अधिक वोट काटे गए, उनमें 13 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस, एक सीट पर कांग्रेस और छह सीटों पर भाजपा विजयी हुई। उन्होंने कहा कि ऐसे में वोट चोरी का आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाता।

2005 और 2009 की घटनाओं का जिक्र

संबित पात्रा ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए 2005 और 2009 की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2005 में सोनिया गांधी ने नवीन चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने की घोषणा की थी, जबकि वह किसी संवैधानिक पद पर नहीं थीं। पात्रा ने दावा किया कि 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर नवीन चावला को चुनाव आयोग से हटाने की सिफारिश की थी और उन पर कांग्रेस के लिए काम करने तथा गोपनीय जानकारी साझा करने के आरोप लगाए थे।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हटाने के बजाय कांग्रेस सरकार ने नवीन चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया और उन्हीं की देखरेख में 2009 का लोकसभा चुनाव कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज वही कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, जबकि अतीत में उसने चुनाव आयोग को प्रभावित करने की कोशिश की थी।

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