नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर से संसद तक निकाले जा रहे मार्च के दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया। पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की और छात्रों के समर्थन में बयान दिए।
अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उनके पार्टी के सांसदों को पुलिस स्टेशन में रखा गया, जबकि बाहर छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही थीं। अखिलेश यादव ने कहा, “अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है? तैयारी किसे करनी थी? सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।”
उन्होंने आगे कहा कि अगर युवाओं को समय पर रोजगार और बेहतर अवसर मिले होते, तो उन्हें सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा, “अंग्रेजों ने भी लोगों के विरोध की आवाज सुनी थी। महात्मा गांधी ने अहिंसक आंदोलन का रास्ता दिखाया था। लेकिन आज की सरकार प्रदर्शनकारियों की बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग कर रही है। यह सरकार नहीं, बल्कि अहंकार है।”
अरविंद केजरीवाल ने जताई नाराजगी
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना था कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने के बजाय सरकार युवाओं पर सख्ती कर रही है। उन्होंने कहा कि देश का युवा इस तरह का व्यवहार और अहंकार बर्दाश्त नहीं करेगा।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- लोकतंत्र पर हमला
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने छात्रों पर हुई कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग करना गलत है और इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है।
क्या है पूरा मामला?
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन छात्र और प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाल रहे थे। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी दागे। इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जबकि सरकार की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

