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Pakistan के राष्ट्रपति का बड़ा बयान- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय बंकरों में छिपी थी PAK सेना

Pakistan president statement

Pakistan president statement

इंटरनेशनल डेस्क: आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शर्मिंदगी का कारण बना है। अपनी सैन्य ताकत का दिखावा करने वाला पाकिस्तान असलियत में कितना कमजोर है, इसका खुलासा इस बार किसी और ने नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने किया है।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति जरदारी ने स्वीकार किया कि भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी सेना बंकरों में छिपी हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय उन्हें खुद भी सुरक्षा कारणों से बंकर में रहने की सलाह दी गई थी। राष्ट्रपति का यह बयान पाकिस्तान की सैन्य स्थिति और उसके दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जरदारी के इस बयान से यह साफ हो गया है कि भारत के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें करने वाला पाकिस्तान असल में अंदर से डरा हुआ और दबाव में था, जिस वक्त पाकिस्तान अपनी सेना की ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा था, उसी दौरान उसकी सेना जमीन के नीचे बंकरों में शरण लिए हुए थी।

 

आर्थिक संकट से गुजर रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश में महंगाई चरम पर है, विदेशी कर्ज लगातार बढ़ रहा है और आम जनता बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रही है। कमजोर अर्थव्यवस्था के चलते पाकिस्तान के पास न तो लंबी सैन्य तैयारी की क्षमता है और न ही किसी बड़े टकराव को झेलने की ताकत। ऐसे हालात में सेना का बंकरों में छिपना यह दिखाता है कि पाकिस्तान भीतर से कितना असुरक्षित है।

हमले के बाद भारत का कड़ा जवाब

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 6 और 7 मई की दरमियानी रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकियों के ठिकानों पर सटीक और सुनियोजित कार्रवाई की। इस ऑपरेशन के तहत कुल 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप और मुख्यालय शामिल थे। इन्हीं ठिकानों से भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की साजिशें रची जा रही थीं।

पहलगाम हमला

22 अप्रैल का दिन भारत के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। यह घटना देश को झकझोर देने वाली थी और आज भी लोगों के दिलों में उस दिन का दर्द जिंदा है। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी टीआरएफ (द रेजिस्टेंस फ्रंट) ने उसी दिन ली थी और सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी तस्वीर भी साझा की थी। घटना को अब तीन महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन पीड़ित परिवारों का दुख और देशवासियों का गुस्सा आज भी बरकरार है। राष्ट्रपति जरदारी के बयान और भारत की सख्त कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि आतंक को पालने वाला पाकिस्तान न सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर है, बल्कि सैन्य और मानसिक रूप से भी दबाव में है।

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