Panchgaon Tops India’s Pollution Chart With AQI 426 : चंडीगढ़। दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। यदि बात करें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तो उसकी रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम के पंचगांव का AQI 426 दर्ज किया। इसके साथ ही पंचगांव देश के 280 निगरानी वाले शहरों में सबसे अधिक प्रदूषित शहर बन गया है।
ये रहे AQI के आंकड़े
गजरौला में AQI 407 दर्ज किया गया, जो देश में दूसरे स्थान पर रहा। हरियाणा का बल्लभगढ़ 397 AQI के साथ तीसरे नंबर पर है। दिल्ली का AQI 382 रहा। गुरुग्राम में 368 और भिवानी में 353 AQI दर्ज किया गया। आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा के कई शहरों में प्रदूषण दिल्ली से भी ज्यादा है। हरियाणा के पंचगांव में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है. वहीं बल्लभगढ़, गुरुग्राम, भिवानी, हिसार, मानेसर, बहादुरगढ़, फरीदाबाद, चरखी दादरी और रोहतक में वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई।
अंबाला और कुरुक्षेत्र की हवा भी खराब
अंबाला, धारूहेड़ा, सोनीपत, जींद, कुरुक्षेत्र, पानीपत और नारनौल में भी हवा खराब श्रेणी में रही। इसके विपरीत पंचकूला में AQI 59 और पलवल में 135 दर्ज किया गया. सिरसा और फतेहाबाद में भी प्रदूषण की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 6 नवंबर को दिल्ली-NCR में GRAP का तीसरा चरण लागू किया। CAQM के आदेश के अनुसार, पहले से लागू GRAP-1 और GRAP-2 के साथ अब GRAP-3 की अतिरिक्त पाबंदियां भी प्रभावी होंगी। इसका असर हरियाणा के NCR में शामिल 14 जिलों पर पड़ेगा।
GRAP-3 के तहत NCR में खुदाई, पाइलिंग, तोड़फोड़, ईंट-चिनाई, सड़क निर्माण, पेंटिंग और टाइल कटिंग जैसे धूल पैदा करने वाले निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, अस्पताल, राष्ट्रीय सुरक्षा और कुछ जरूरी सार्वजनिक परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के साथ छूट मिलेगी। इसके अलावा पूरे NCR में स्टोन क्रशर और खनन गतिविधियां बंद रहेंगी। नए आदेश के तहत BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल या इससे पुराने मानक वाले चार पहिया हल्के मोटर वाहनों पर दिल्ली के अलावा गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में प्रतिबंध लागू होगा।
गुरुग्राम और फरीदाबाद में पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई का विकल्प देना अनिवार्य किया गया है। विद्यार्थी और अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई चुन सकते हैं। राज्य सरकारें सरकारी, नगर निकाय और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने और बाकी को वर्क फ्रॉम होम देने का फैसला कर सकती हैं।

