कुल्लू (सृष्टि शर्मा): देवभूमि कुल्लू मनाली में कई सारे धार्मिक स्थान है। प्राचीन काल से ही इस घाटी में कई सारी कहानियां जुड़ी हुई है। कहा जाता है की पांडव भी अपने अज्ञातवास के दौरान इस घाटी में आए थे। इस दौरान पांडवों ने कई मंदिर बनाए, कई जगहों पर रुक कर अपनी कोई न कोई निशानी यहां छोड़ दी। इस घाटी में अलग-अलग स्थानों पर पांडवों से जुड़ी कई चीजे आज भी मौजूद है। कुल्लू से लगभग 54 किलोमीटर दूर बसे सेथन गांव में पांडव काल की एक छोटी झील मौजूद है। जिसे पांडु रोपा कहा जाता है। इस झील में पांडवों ने धान की रोपाई की थी। आज भी कहा जाता है की गर्मियों में इस झील में उगने वाली घास बिलकुल ऐसी प्रतीत होती है, मानो यहां धान के खेत लगे हो।
इस स्थान के जल की भी विशेष महत्व मानना जाता है। इस पवित्र जल से त्वचा के रोगों से निजात मिलती है। पहाड़ों के बीचों बीच बसे इस स्थान में शांति का ऐहसास होता है। और भीड़ भाड़ से दूर अंतरमन की शांति के लिए भी यहां आते है। इस झील के ऊपर का स्थान हिमस्खलन संभावित एरिया है। इसलिए माना जाता है की पहाड़ी पर मरने वाले जानवरों की हड्डियां बर्फ के साथ इस स्थान के आसपास पहुंच जाती है। इस क्षेत्र में अब पर्यटकों ने रुख करना शुरू कर दिया है। लेकिन आज भी इस साथ की पवित्रा बरक़रार है।
