Parliament Budget Session 2026: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन, सोमवार को लोकसभा में मिडिल ईस्ट (मध्य-पूर्व) में चल रहे संकट पर चर्चा हुई। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद को मौजूदा स्थिति की जानकारी दी और सरकार की चिंता भी व्यक्त की। विदेश मंत्री ने बताया कि 28 फरवरी से इस क्षेत्र में संघर्ष शुरू हुआ है। इस संघर्ष के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। खबरों के मुताबिक, इस हिंसा में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े कुछ लोगों की भी मौत होने की बात सामने आई है। इस स्थिति से पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
भारत ने संयम बरतने की अपील की
भारत सरकार ने इस बढ़ते तनाव को लेकर सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और संयम बरतने की अपील की है। भारत का मानना है कि बातचीत और कूटनीतिक तरीके से ही इस संकट का समाधान निकाला जाना चाहिए।
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— SansadTV (@sansad_tv) March 9, 2026
CCS की बैठक में स्थिति की समीक्षा
1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में ईरान पर हुए हमलों और उसके बाद पैदा हुई स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।
क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि इस संघर्ष का क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है। साथ ही, इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की कीमतों जैसे आर्थिक मुद्दों पर भी क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर विचार किया गया। इसके बाद सभी मंत्रालयों को स्थिति के अनुसार जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
विदेशों में रहने वाले भारतीयों को लेकर चिंता
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह संघर्ष भारत के लिए इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं। इसके अलावा ईरान में भी कई भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और कुछ लोग वहां काम के लिए रह रहे हैं।
सरकार की प्राथमिकता भारतीयों की सुरक्षा
सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा है। इसलिए भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है।