Last Updated: November 5, 2026

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यात्रीगण कृप्या ध्याद दें, अब फिर पटरी पर लौटेगी ट्रेन, शंभू रेलवे ट्रैक से किसानों ने धरना हटाने का किया ऐलान, लाखों यात्रियों ने ली राहत की सांस

May 21, 2024

यात्रीगण कृप्या ध्याद दें, अब फिर पटरी पर लौटेगी ट्रेन, शंभू रेलवे ट्रैक से किसानों ने धरना हटाने का किया ऐलान, लाखों यात्रियों ने ली राहत की सांस

चंडीगढ़। किसानों ने सोमवार को शंभू रेलवे ट्रैक से रेल रोको धरना हटाने का ऐलान किया है। निस्संदेह किसानों का यह ऐलान ट्रेनों से सफर करने वाले उन लाखों लोगों के लिए राहत का संदेश लेकर आया है जो अपने काम के सिलसिले में पंजाब से बाहर हैं।

इसके साथ ही पंजाब के उन उद्योगपतियों ने भी राहत की सांस ली है, जिनका कारोबार इस विरोध के कारण प्रभावित हो रहा था। 13 फरवरी को पंजाब के कुछ किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर ‘दिल्ली चलो’ का नारा लगाकर आंदोलन शुरू किया, लेकिन हरियाणा सरकार ने पंजाब के भीतर की सीमाएं सील कर दीं और किसानों को हरियाणा में प्रवेश नहीं करने दिया।

हालांकि किसानों ने कई बार हरियाणा में घुसने की कोशिश की, लेकिन भारी बंदोबस्त के चलते आंदोलनकारी किसान हरियाणा में दाखिल नहीं हो सके।

इसके चलते किसानों ने शंभू बॉर्डर पर ही पक्का मोर्चा लगा लिया, जिसे अब 100 दिन पूरे होने वाले हैं। आंदोलन के इस दौर में अब तक 20 से ज्यादा किसानों की जान जा चुकी है।

किसान नेताओं ने सोमवार को यह भी घोषणा की कि आंदोलन के सौ दिन पूरे होने पर शंभू बॉर्डर पर 40-50 हजार किसानों की बड़ी सभा होगी। इसमें एक बात बेहद अहम है कि ज्यादातर किसान संगठनों ने इस आंदोलन से दूरी बना रखी है।

उन्होंने कहा कि आंदोलन का यह तरीका किसी भी तरह से सही नहीं है। इससे कोई फायदा नहीं होगा, उल्टे इससे किसानों की छवि ही खराब होगी। इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों का रुख अलग-अलग रहा है।

ज्यादातर राजनीतिक दल किसानों की मांगों का समर्थन करते हैं लेकिन आंदोलन के बारे में कुछ भी कहने से बचते रहे हैं। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस बीच 17 अप्रैल को शंभू रेलवे ट्रैक पर भी किसानों ने डटकर मोर्चा लगा लिया, जिससे रेल यातायात प्रभावित हुआ।

रोजाना करीब 200 ट्रेनें प्रभावित हुईं
धरने से रोजाना करीब 200 ट्रेनें प्रभावित हुईं। इनमें से 65 ट्रेनें रद्द की जा रही हैं। बाकी को या तो देरी से चलाया गया या वैकल्पिक मार्गों से भेजा गया। इससे रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा था। पंजाब के उद्योग जगत को नुकसान हो रहा था, जिसके चलते अब उद्योगपतियों ने किसानों के खिलाफ खुलकर बोलना शुरू कर दिया।

दस दिनों के भीतर रेलवे ट्रैक खाली नहीं किए…
ऑल इंडस्ट्रीज एंड ट्रेड फोरम (एआईटीएफ) ने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर दस दिनों के भीतर रेलवे ट्रैक खाली नहीं किए गए तो वह किसानों के खिलाफ मोर्चा खोल देंगे। इसमें कोई शक नहीं कि किसान नेताओं के इस फैसले से जहां पंजाब के रेलवे और उद्योगों को नुकसान से बचाया जा सकेगा, वहीं इससे परेशान लाखों लोगों को भी राहत मिलेगी।

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