नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राजधानी स्थित सेवा तीर्थ में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। यह मीटिंग करीब साढ़े चार घंटे तक चली। इस बैठक में केंद्र सरकार के कई अहम मंत्रालयों ने अपने कामकाज, योजनाओं और अब तक की प्रगति को लेकर प्रस्तुति दी। बैठक में कृषि, वन, श्रम, सड़क परिवहन, कॉरपोरेट मामलों, विदेश, वाणिज्य और ऊर्जा जैसे प्रमुख मंत्रालय शामिल रहे। सभी मंत्रालयों ने अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी प्रधानमंत्री के सामने रखी।
काम में तेजी लाने के दिए निर्देश
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों और अधिकारियों को साफ तौर पर कहा कि सरकारी कामकाज में तेजी और बेहतर कार्यक्षमता बेहद जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि फाइलों को बिना अनावश्यक देरी के जल्द निपटाया जाए और कम समय में ज्यादा काम करने की दिशा में प्रयास किए जाएं। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने शासन व्यवस्था को और आसान, पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुधारों की प्रक्रिया लगातार जारी रहनी चाहिए ताकि आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
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‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य पर जोर
प्रधानमंत्री ने बैठक में ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यह सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य है। भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सभी मंत्रालयों को पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ काम करना होगा। सूत्रों के अनुसार, बैठक में उन मंत्रालयों के प्रदर्शन की भी समीक्षा की गई, जिनका काम अपेक्षाकृत कमजोर माना गया। ऐसे विभागों को कमियों को दूर कर बेहतर परिणाम देने के निर्देश दिए गए।
विदेश दौरे की सफलता पर दी गई बधाई
बैठक में मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने प्रधानमंत्री मोदी को हाल ही में हुए उनके पांच देशों के सफल विदेश दौरे के लिए बधाई दी। इस दौरान विदेश मंत्रालय की ओर से दौरे के नतीजों और उसके कूटनीतिक महत्व की जानकारी भी साझा की गई। प्रधानमंत्री का यह दौरा संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली तक फैला हुआ था। माना जा रहा है कि इस दौरे से भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आर्थिक सहयोग को मजबूती मिली है।
जनता तक पहुंचाने होंगे सरकार के काम
प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को निर्देश दिए कि वे लोगों के बीच जाकर केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों के काम और उपलब्धियों की जानकारी जनता तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों के बारे में लोगों को जागरूक करना जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक को सरकार के कामकाज की मध्यावधि समीक्षा यानी मिड-टर्म रिव्यू के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिसमें आगे की रणनीति और प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई।
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ऊर्जा संकट और वैश्विक हालात पर भी चर्चा
यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब दुनिया भर में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी वजह से बैठक में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की गई। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और कई राज्य मंत्री शामिल हुए।

