PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि कोई भी भारतीय यह कभी नहीं भूलेगा कि आपातकाल के दौरान किस तरह संविधान की भावना का उल्लंघन किया गया। उन्होंने संवैधानिक सिद्धांतों को मजबूत करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर की पोस्ट में PM मोदी ने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक था। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान में निहित मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया, मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को दबा दिया गया और बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया।
When the Emergency was imposed, I was a young RSS Pracharak. The anti-Emergency movement was a learning experience for me. It reaffirmed the vitality of preserving our democratic framework. At the same time, I got to learn so much from people across the political spectrum. I am… https://t.co/nLY4Vb30Pu
— Narendra Modi (@narendramodi) June 25, 2025
प्रधानमंत्री ने कहा, “ऐसा लग रहा था जैसे उस समय सत्ता में मौजूद कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को बंधक बना लिया हो।” प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने पिछले साल घोषणा की थी कि आपातकाल की बरसी को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 42वें संशोधन ने संविधान में व्यापक बदलाव किए, जो कांग्रेस सरकार की साजिश का एक प्रमुख उदाहरण है, जिसने आपातकाल लगाया था, जिसे बाद में जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने वापस ले लिया था।
उन्होंने कहा कि गरीब, हाशिए पर पड़े लोगों और दलितों को खास तौर पर निशाना बनाया गया और उनकी गरिमा का हनन किया गया। मोदी ने कहा, “हम अपने संविधान में निहित सिद्धांतों को मजबूत करने और एक विकसित भारत के अपने सपने को साकार करने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराते हैं। आइए हम प्रगति की नई ऊंचाइयों को छुएं और गरीबों और दलितों के सपनों को पूरा करें।”
आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में डटे रहने वाले सभी लोगों को सलाम करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये लोग पूरे भारत, हर क्षेत्र, हर विचारधारा से थे, जिन्होंने एक ही उद्देश्य के लिए मिलकर काम किया: भारत के लोकतांत्रिक ताने-बाने की रक्षा करना और उन आदर्शों को कायम रखना, जिनके लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया था।
उन्होंने कहा, “यह उनका सामूहिक संघर्ष था, जिसने सुनिश्चित किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार लोकतंत्र को बहाल करे। नए चुनाव कराने पड़े, जिसमें वे (कांग्रेस पार्टी) बुरी तरह हार गए।”

