नई दिल्लीः PM Narendra Modi आज अपनी सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक हाई लेवल बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच देश की ऊर्जा स्थिति की समीक्षा की जाएगी। सूत्रों से मिली जानका के अनुसार यह बैठक मौजूदा हालात के भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए बुलाई गई है। खास तौर पर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर सरकार चिंतित है।
तेल, गैस और बिजली पर होगी खास चर्चा
इस बैठक में देश की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक जैसे जरूरी क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। भारत इन चीजों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, इसलिए वहां की स्थिति का सीधा असर देश पर पड़ सकता है।
सप्लाई बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता
सरकार का सबसे बड़ा फोकस यह है कि देश में जरूरी चीजों की सप्लाई बिना रुके जारी रहे। इसके लिए लॉजिस्टिक्स (आवाजाही), स्टोरेज और वितरण व्यवस्था को मजबूत रखने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आम लोगों और उद्योगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
जंग का असर ग्लोबल सप्लाई चेन पर
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है। ऐसे में वहां किसी भी तरह का संकट भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इसलिए सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।
विकल्प और रणनीति पर काम
सरकार पहले से ही वैकल्पिक उपायों पर विचार कर रही है। अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो अन्य देशों से सप्लाई लेने या स्टॉक बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी अहम
इस बैठक में विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी चर्चा हो सकती है। खासकर पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की स्थिति पर सरकार नजर बनाए हुए है।
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