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व्यक्तिगत विकास से ही होगी राष्ट्र की प्रगति, स्वामी चिन्मयानंद के विचारों को पीएम मोदी ने किया याद

PM Modi remembered the thoughts of Swami Chinmayanand

PM Modi remembered the thoughts of Swami Chinmayanand

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि हर व्यक्ति की उन्नति का उद्देश्य केवल अपनी तरक्की तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे देश की प्रगति में भी योगदान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और देश के प्रति जिम्मेदारी को समझता है, तभी राष्ट्र मजबूत बनता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये बातें नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान कहीं। 23 से 25 अक्टूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के विचारों, उनकी शिक्षाओं और देश के विकास में उनके योगदान को याद किया।

स्वामी चिन्मयानंद ने आध्यात्मिकता को राष्ट्र सेवा से जोड़ा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वैदिक मंत्र “वयं राष्ट्र जागृयाम पुरोहितः” का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस मंत्र का संदेश है कि हमें राष्ट्र को जागरूक, सशक्त और उन्नत बनाने के लिए काम करना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने अपना पूरा जीवन इसी विचार के अनुसार जिया। वे आध्यात्मिक विषयों पर जितनी गंभीरता और स्पष्टता से बात करते थे, उतनी ही मजबूती से राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार रखते थे। इसकी वजह यह थी कि भारत हमारी संस्कृति और परंपराओं का आधार है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद का मानना था कि आध्यात्मिक विकास और देश की प्रगति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। व्यक्ति को अपने जीवन में आगे बढ़ने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी योगदान देना चाहिए।

भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान जगाना था स्वामी जी का उद्देश्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद के मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीयों के मन में अपने देश और संस्कृति के प्रति आत्मसम्मान पैदा करना था। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से स्वामी चिन्मयानंद ने गीता ज्ञान यज्ञ की शुरुआत की। इसके माध्यम से उन्होंने भगवद्गीता, उपनिषद, वेदांत और अन्य भारतीय धर्मग्रंथों की शिक्षाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

पीएम मोदी के अनुसार, स्वामी चिन्मयानंद चाहते थे कि भारतीय लोग अपनी आध्यात्मिक विरासत को समझें और उसके मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं। आज उनके प्रयासों के परिणाम दिखाई दे रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग उनकी शिक्षाओं से प्रेरणा ले रहे हैं।

चिन्मय मिशन केवल संस्था नहीं, एक विचार है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन को केवल एक संगठन के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह एक ऐसा विचार है, जिसकी नींव स्वामी चिन्मयानंद ने रखी थी। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में मिशन की यात्रा आध्यात्मिक संकल्प, सेवा और समर्पण से भरी रही है। स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं ने लोगों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन के मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा दी है।

पीएम मोदी ने सम्मेलन में मौजूद मिशन के कार्यकर्ताओं, देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं और साधकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का हिस्सा बनना उनके लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव है और यह संतों के स्नेह एवं आशीर्वाद का परिणाम है।

आध्यात्मिक विकास के साथ राष्ट्र निर्माण पर जोर

प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि व्यक्तिगत उन्नति तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज और देश को भी मिले। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के जीवन और कार्यों का उदाहरण देते हुए भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्रीय जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित किया।

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं को याद किया जा रहा है। इन शिक्षाओं का मूल संदेश है कि व्यक्ति अपने जीवन में ज्ञान, सेवा और अच्छे संस्कारों को अपनाकर न केवल स्वयं का विकास कर सकता है, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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