नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई भारी कीमत भी चुकानी पड़ी, तो वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह बयान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में हरित क्रांति के जनक माने जाने वाले डॉ. एमएस स्वामीनाथन के शताब्दी जन्म समारोह पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान दिया। उन्होंने कहा, “हमारे लिए देश के अन्नदाता सर्वोपरि हैं। भारत अपने कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को बाहरी दबाव में आकर कभी नहीं खोलेगा।”
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi says, “For us, the interest of our farmers is our top priority. India will never compromise on the interests of farmers, fishermen and dairy farmers. I know personally, I will have to pay a heavy price for it, but I am ready for it.… pic.twitter.com/W7ZO2Zy6EE
— ANI (@ANI) August 7, 2025
ट्रंप की टैरिफ नीति पर भारत का सख्त रुख
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात पर टैरिफ दरों को 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की घोषणा की थी। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से भारत के कृषि और डेयरी सेक्टर को अमेरिकी बाजार के लिए खोलने की मांग करता रहा है, लेकिन भारत सरकार इस पर अडिग रही है कि इससे देश की बड़ी आबादी को नुकसान होगा।
भारत ने शुरुआत में इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाया और अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर कई दौर की गंभीर बातचीत हुई। लेकिन जब अमेरिका ने डेयरी और कृषि सेक्टर में व्यापक पहुंच की मांग की, तो भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने किसानों के भविष्य से कोई समझौता नहीं करेगा।
60% आबादी की आजीविका दांव पर
भारत की करीब 60 फीसदी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोल दिया गया, तो यह भारतीय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भारी झटका साबित होगा।
पीएम मोदी के इस बयान को न सिर्फ घरेलू स्तर पर किसानों के साथ एकजुटता के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की आत्मनिर्भरता और स्थानीय हितों की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

