नेशनल डेस्क: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरियाणा में स्थित अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से राफेल उड़ान भरी है। इस दौरान एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। राष्ट्रपति की उड़ान भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश के लिए गौरव की बात है। द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर हैं। इस नाते वह तीनों सेनाओं की कमांडर भी हैं।
बता दें इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 एमकेआई लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। यह उड़ान उन्होंने 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन से भरी थी। उस उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा था कि वायुसेना के पायलटों की दक्षता और अनुशासन की जितनी सराहना की जाए उतना ही कम है।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राष्ट्रपति की यात्रा को देखते हुए जिला प्रशासन और वायुसेना की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने बताया कि राष्ट्रपति दिल्ली से हवाई मार्ग द्वारा सीधे अंबाला छावनी के वायुसेना स्टेशन पहुंचीं। एयरफोर्स स्टेशन के आसपास ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। साथ ही स्टेशन के अंदर किसी को भी मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है। केवल अधिकृत अधिकारियों और कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति है।
भारत और राफेल विमान का सफर
भारत ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे हैं। इनमें से पहली खेप 27 जुलाई 2020 को भारत पहुंची थी। उस वक्त 5 राफेल विमान अंबाला एयरबेस पर उतरे थे। ये विमान फ्रांस के मेरिग्नैक एयरबेस से उड़ान भरकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अल दफरा एयरबेस पर रुके और फिर भारत पहुंचे थे। इसके बाद 10 सितंबर 2020 को अंबाला एयरबेस पर एक भव्य समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने शिरकत की थी। उसी दिन राफेल विमानों को भारतीय वायुसेना की 17वीं स्क्वॉड्रन ‘गोल्डन एरोज’ में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खुद भी राफेल विमान में उड़ान भर चुके हैं। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी इस आधुनिक और शक्तिशाली विमान में उड़ान भरने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। यह उड़ान भारतीय वायुसेना के लिए गौरव का क्षण और देश के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पल माना जा रहा है।