Last Updated: September 22, 2026

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राष्ट्रपति ने लड़ाकू विमान राफेल में भरी उड़ान, 30 मिनट आसमान में बिताया समय

October 30, 2025

राष्ट्रपति ने लड़ाकू विमान राफेल में भरी उड़ान, 30 मिनट आसमान में बिताया समय

अंबाला छावनी: राष्ट्रपति द्रौपदी मुमरू ने बुधवार को हरियाणा के अंबाला में स्थित वायु सेना स्टेशन से राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी और इसे अविस्मरणीय अनुभव बताया। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी इसी एयरबेस से एक अलग विमान में उड़ान भरी। राष्ट्रपति मुमरू 2 लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं। अप्रैल 2023 में, सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर मुमरू ने असम के तेजपुर वायु सेना स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी। राफेल विमान में सवार होने से पहले राष्ट्रपति ने ‘जी-सूट’ पहना था। हाथ में हैलमेट लिए और धूप का चश्मा लगाए मुमरू ने पायलट के साथ तस्वीरें भी खिंचवाई।

सुबह 11.27 बजे विमान के उड़ान भरने से पहले राष्ट्रपति ने विमान के अंदर से हाथ हिलाकर अभिवादन किया। विमान ने लगभग 30 मिनट तक उड़ान भरी और करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद वापस वायु सेना स्टेशन पर लौटा। विमान 17वीं स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी ने उड़ाया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई। राफेल विमान ने समुद्र तल से लगभग 15,000 फुट की ऊंचाई पर और लगभग 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी। बुधवार सुबह वायु सेना स्टेशन पहुंचने पर राष्ट्रपति को औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया।

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राष्ट्रपति ने बाद में आगंतुक पुस्तिका (विजिटर बुक) में लिखा, अंबाला वायु सेना स्टेशन पहुंचकर वायु सेना के राफेल विमान में अपनी पहली उड़ान को लेकर मैं बहुत प्रसन्न हूं। राफेल में उड़ान भरना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। इस शक्तिशाली विमान पर इस पहली उड़ान ने मेरे अंदर देश की रक्षा क्षमताओं के प्रति गर्व की एक नयी भावना जगाई है। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने क्रमश: 8 जून, 2006 और 25 नवंबर, 2009 को पुणो के पास लोहेगांव वायु सेना स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी।

फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निíमत राफेल लड़ाकू विमान को सितंबर 2020 में अंबाला वायु सेना स्टेशन पर भारतीय वायु सेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। पहले 5 राफेल विमानों को 17वें स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज’ में शामिल किया गया था। ये विमान 27 जुलाई, 2020 को फ्रांस से यहां लाए गए थे। पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों में आतंकी ढांचों को नष्ट करने के लिए 7 मई को शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में राफेल विमानों का इस्तेमाल किया गया था। इन हमलों के बाद 4 दिन तक भीषण सैन्य झड़प हुईं, जो सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनने के बाद 10 मई को समाप्त हुईं।

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