नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने एथेनॉल-आधारित हरित ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सोमवार से फ्लैक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 100 प्रतिशत एथेनॉल (ई100) ईंधन से संबंधित नए उत्सर्जन और ईंधन मानक लागू हो गए हैं।
नए नियमों के तहत सरकार ने विभिन्न उत्सर्जन मानकों और परीक्षण प्रक्रियाओं में केवल ई85 ईंधन के संदर्भों को बदलकर ई85 या ई100 कर दिया है। इससे फ्लैक्स-फ्यूल वाहनों में 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के उपयोग का मार्ग प्रशस्त हो गया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई85 या ई100 ईंधन का उपयोग केवल उन्हीं फ्लैक्स-फ्यूल वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) इस प्रकार के ईंधन के लिए डिजाइन करेंगे।
संशोधित नियमों में कुछ वाहन और ईंधन श्रेणियों में भी बदलाव किए गए हैं। उदाहरण के लिए, एक उत्सर्जन तालिका में सकल वाहन भार की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी गई है। इसके अलावा हाइड्रोजन-कंप्रैस्ड नैचुरल गैस (एचसीएनजी), 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पैट्रोल (ई20), बायोडीजल मानकों और उत्सर्जन परीक्षण से संबंधित तकनीकी संशोधन भी किए गए हैं।
इस वर्ष की शुरुआत में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि यदि वाहन पूरी तरह एथेनॉल पर चलें तो ईंधन की लागत लगभग 25 रुपए प्रति लीटर पैट्रोल के बराबर हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि दुनिया के 19 देशों में एथेनॉल का उपयोग हो रहा है और भारत में भी अब तक इससे वाहनों को लेकर कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई है।

