जनहित याचिका (PIL) – कमजोर की आवाज या प्रतिशोध का हथियार?

जब न्याय के द्वार समाज के कमजोर और उपेक्षित वर्ग के लिए बंद प्रतीत होने लगे, तब जनहित याचिका यानी पीआईएल (पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन) आशा की सशक्त किरण बनकर उभरी। 1970 के दशक के अंत में न्यायमूर्ति पीएन भगवती और वीआर कृष्णा अय्यर ने इसकी दूरदर्शी आधारशिला रखी। लोगों को न्याय दिलाना ही लक्ष्य इसका … Continue reading जनहित याचिका (PIL) – कमजोर की आवाज या प्रतिशोध का हथियार?