सार्वजनिक शौचालय: विकास के आईने पर जमी गंदगी

Public toilets : mirror of development covered in filth : स्वच्छता किसी राष्ट्र का सिंगार नहीं, उसका चरित्र है। किसी देश की असली पहचान संसद, मेट्रो या एक्सप्रेस-वे नहीं, बल्कि वह सार्वजनिक शौचालय है जहां सामान्य नागरिक बिना भय, घृणा या नाक सिकोड़े प्रवेश कर सके। शौचालयों में दम तोड़ता स्वच्छ भारत पिछले एक दशक … Continue reading सार्वजनिक शौचालय: विकास के आईने पर जमी गंदगी