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कौन था पुलवामा हमले का मास्टमाइंड Hamza Burhan, जिसका भारत विरोधी गतिविधियों का लंबा इतिहास

नेशनल डेस्कः पुलवामा हमले से जुड़े एक वॉन्टेड आतंकवादी को गुरुवार को पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद इलाके में मार गिराया गया। आतंकवादी की पहचान हमजा बुरहान के तौर पर हुई है। उस पर अनजान बंदूकधारियों ने गोलियां चलाईं, जिससे उसे कई गोलियां लगीं। सूत्रों का दावा है कि हमले के दौरान चोटों के कारण उसकी मौत हो गई।

यह गोलीबारी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मौजूद मुजफ्फराबाद में हुई। अधिकारियों ने अभी तक हमलावरों की पहचान या हत्या के पीछे के मकसद के बारे में कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया है। हमजा बुरहान को कथित तौर पर पुलवामा हमले से जुड़े आतंकी ऑपरेशन से जुड़े मुख्य मास्टरमाइंड में से एक माना जाता था।

बुरहान का भारत विरोधी गतिविधियों का लंबा इतिहास

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, बुरहान का भारत विरोधी गतिविधियों का लंबा इतिहास रहा है और वह जम्मू-कश्मीर में युवाओं को मिलिटेंसी और रेडिकलाइजेशन की ओर धकेलने के लिए जिम्मेदार था। वह मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। कहा जाता है कि वह सात साल पहले सही कागज़ात लेकर पाकिस्तान गया था और अल-बद्र आतंकी संगठन में शामिल हो गया था। बाद में वह आतंकी ग्रुप का ऑपरेशनल कमांडर बन गया और इसके लिए मिलिटेंट्स की भर्ती करने के लिए ज़िम्मेदार था। इसके अलावा, वह जम्मू-कश्मीर में ग्रुप के लिए हथियारों की सप्लाई भी देखता था।

2022 में, सरकार ने उसे आतंकी घोषित कर दिया। एजेंसियों का मानना ​​है कि बुरहान पुलवामा और साउथ कश्मीर के दूसरे हिस्सों में आतंक फैलाने वाले मास्टरमाइंड में से एक था। उनका मानना ​​था कि बुरहान ने लोगों को भड़काने और युवाओं को भर्ती करने के लिए ‘डिजिटल रेडिकलाइज़ेशन’ मॉडल का इस्तेमाल किया, जिसमें सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना शामिल था।

14 फरवरी, 2019 को हुआ था पुलवामा हमला

पुलवामा हमला 14 फरवरी, 2019 को हुआ था, जब एक सुसाइड बॉम्बर ने जम्मू-कश्मीर में पुलवामा के पास भारत के सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) के काफ़िले को निशाना बनाया था। हमलावर ने विस्फोटकों से लदी गाड़ी को सुरक्षाकर्मियों को ले जा रही बस से टकरा दिया, जिसमें 40 CRPF जवान मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। पाकिस्तान के मिलिटेंट ग्रुप जैश-ए-मोहम्मद ने इसकी ज़िम्मेदारी ली थी। इस हमले से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तेज़ी से बढ़ गया और इसके बाद डिप्लोमैटिक और मिलिट्री जवाबी कार्रवाई हुई, जिसमें भारत की बालाकोट एयरस्ट्राइक भी शामिल थी। यह इस इलाके के इतिहास में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए सबसे खतरनाक आतंकवादी हमलों में से एक था।

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