Last Updated: October 7, 2026

Dainik Savera Times Logo

7 बच्चों का पिता, 11 बच्चों का दादा… पुणे के 65 साल दुष्कर्मी को मौत की सजा, 3 साल की बच्ची को बनाया था हवस का शिकार

June 29, 2026

7 बच्चों का पिता, 11 बच्चों का दादा… पुणे के 65 साल दुष्कर्मी को मौत की सजा, 3 साल की बच्ची को बनाया था हवस का शिकार

नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र के पुणे जिले में 3 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या करने के आरोपी 65 साल के दोषी भीमराव कांबले को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी। ये फैसला वारदात के 60 दिन बाद आया है।

ये भी पढ़ें :-

 

7 बच्चों का पिता और 11 बच्चों का दादा है दोषी

अदालत ने कहा कि दोषी का कृत्य क्रूर और अमानवीय था। सोमवार सुबह 11 बजे आरोपी को अदालत में पेश किया। कांबले पेशे से मजदूर है। वह 7 बच्चों का पिता और 11 बच्चों के दादा हैं। कांबले पर पहले भी एक महिला और 17 साल की किशोरी से साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप है। यह घटना एक मई को पुणे के नसरापुर गांव की है। बच्ची गर्मियों की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आई थी। दोपहर 3 से 4 बजे के बीच कांबले ने उसे खाने-पीने की चीजें और गाय का बछड़ा दिखाने का लालच देकर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसके बाद वह उसे मवेशियों के तबेले के पास बने एक शेड में ले गया, जहां उसने उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी। जज एसआर सालुंखे का कहना था कि यह अपराध अत्यंत जघन्य तरीके से किया गया है। इसमें पीड़िता के साथ अमानवीय व्यवहार और यातना शामिल थी। पीड़िता एक मासूम, असहाय बच्ची थी। यह हत्या सेक्स के लिए की गई, जो पूर्ण रूप से नैतिक पतन को बताती है। यह बिना किसी उकसावे के ठंडे दिमाग की हत्या है। यह अपराध इतनी बेरहमी से अंजाम दिया गया कि यह न केवल न्यायिक विवेक को, बल्कि समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर देता है।

पहले भी कर चुका ऐसा अपराध

बच्ची के वकील ने कहा कि कांबले सुधरने योग्य नहीं है। इससे पहले वह एक 62 साल की महिला, एक 17 साल की लड़की और एक पशु के साथ भी अपराध कर चुका है। कांबले के वकील ने कोर्ट में उम्र का हवाला दिया। कोर्ट ने माना कि अपराधी की उम्र सजा कम करने का नहीं बल्कि सजा बढ़ाने का कारण है। जज ने कहा, ‘इस उम्र में भी आरोपी की वासना की प्यास नहीं बुझी, बल्कि यह एक अत्यंत खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। पीड़िता के शरीर पर पाई गई चोटें मात्र 3 साल की बच्ची के साथ आरोपी के अमानवीय व्यवहार को उजागर करती हैं। जज ने कहा कि दोषी ने बच्ची के साथ जो करना चाहा वह निडरता से हिंसक तरीके से और बिना किसी परिणाम की परवाह किए किया, क्योंकि उसे पूर्व अनुभव था कि मुकदमे में भी कुछ नहीं होगा।’ जज ने कहा, निर्भया कांड के बाद बच्चों के विरुद्ध अपराधों में फौरन सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून और विशेष अदालतें बनाए जाने के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं। समाज की सामूहिक अंतरात्मा बार-बार आहत होती रहती है।

जज के पूछने पर दोषी बोला- नहीं किया अपराध

मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की गई थी। जस्टिस सालुंखे ने सजा पर फैसला 29 जून के लिए सुरक्षित रखा था। दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत ने कांबले से पूछा कि उसे क्या सजा दी जानी चाहिए। इस पर कांबले ने कहा कि उसने कोई अपराध नहीं किया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी में न तो पश्चाताप के कोई संकेत दिखाई दिए और न ही उसके सुधरने की कोई संभावना है। ऐसे में उसके लिए केवल मृत्युदंड ही उचित सजा है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक अजय मिसर ने 55 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। इनमें फोरेंसिक विशेषज्ञ, जांच अधिकारी, पीड़िता के परिजन और बाल गवाह शामिल थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर 18 चोटों के निशान दर्ज किए गए थे। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए CCTV फुटेज, डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, पोटेंसी टेस्ट और मेंटल फिटनेस असेसमेंट को वैध और पर्याप्त साक्ष्य माना।

ये भी पढ़ें :-

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें