Site icon Dainik Savera Times

नदियों में बहकर आई कटी हुई लकड़ी के मामले में वन विभाग की कार्य प्रणाली पर उठे सवाल, उद्योग मंत्री ने की जांच की मांग

Forest Department : उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन चौहान ने राज्य में आई आपदा के दौरान नदियों में बहकर आई कटी हुई लकड़ी के मामले में वन विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि रावी नदी और पंडोह डैम सहित कई जल स्नेतों में भारी मात्र में कटी हुई लकड़ियां और लॉग्स बहकर आना इस बारे संकेत देते हैं कि पहाड़ों में ऐसे स्थानों पर वनों का कटान हो रहा है जहां पहुंचा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। हर्ष वर्धन चौहान शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे।

उद्योग मंत्री ने कहा कि वर्तमान में आईएफएस अधिकारी और डीएफओ जंगलों का नियमित मुआयना नहीं करते और जंगलों को मात्र वन रक्षकों के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि जंगलों में किस स्तर पर कटान हो रहा है, कितने लोग इसमें संलिप्त हैं और किस क्षेत्र से लकड़ियां बह कर आईं, यह सब जांच का विषय है। भूस्खलन से पेड़ बहना समझ में आता है, लेकिन स्लीपर और लॉग्स का बहना अवैध कटान की ओर इशारा करता है। उन्होंने वन विभाग से आग्रह किया कि वह इस पर गंभीरता से विचार करे और उच्च स्तरीय जांच कराए।

जीएसटी में बदलाव से राहत, क्षति पूर्ति की मांग : उद्योग मंत्री ने जीएसटी में किए गए बदलाव पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चार स्लैब की जगह अब दो स्लैब कर दिए गए हैं, जिससे आम आदमी को जरूर राहत मिलेगी, लेकिन इससे राज्यों को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश को इस बदलाव से करीब 1000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पहले ही वित्त मंत्री से इस नुकसान की भरपाई की मांग कर चुके हैं। मंत्री ने बताया कि जहां भाजपा शासित राज्य इस मुद्दे पर खुलकर नहीं बोल रहे, वहीं गैर-भाजपा शासित राज्यों ने इस पर स्पष्ट विरोध जताया है और केंद्र से क्षतिपूर्ति की मांग की है, ताकि विकास कार्यों पर असर न पड़े।

एनएच की गुणवत्ता पर उठाए सवाल : हर्ष वर्धन चौहान ने नेशनल हाईवे की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एनएच द्वारा बनाई गई फाल्टी डीपीआर और मैदानी क्षेत्रों के हिसाब से लगाए गए डंगे पहाड़ी क्षेत्रों में बार-बार सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कुल्लू-मनाली मार्ग इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब जरूर है , लेकिन हिमाचल के पास अपने संसाधन हैं। विधानसभा ने केंद्र को राज्य को राष्ट्रीय आपदा क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव भेजा है और अब केंद्र सरकार से खुले मन से सहायता की अपेक्षा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी प्रभावित राज्यों के लिए समिति के गठन की बात कह चुके हैं।

Exit mobile version