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राधाष्टमी पर श्रीकृपा बिहारी मंदिर में गूंजे राधे-राधे के जयघोष

Radhashtami Celebrated with Devotion : कुरुक्षेत्र। राधाष्टमी के पावन अवसर पर गीता ज्ञान संस्थानम् स्थित श्रीकृपा बिहारी जी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और मंदिर परिसर राधे-राधे व भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा।

इस अवसर पर भगवद्गीता जी की आरती की गई। भजन-कीर्तन और प्रभु के नाम का गुणगान अारंभ होते ही श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। मंदिर परिसर में राधे-राधे और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष गूंजते रहे। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि किसी भी विधि-विधान का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसमें श्रद्धा और भाव जुड़ा हो। भाव के बिना की गई क्रिया केवल बाहरी क्रिया बनकर रह जाती है, जबकि श्रद्धा से किया गया छोटा-सा कार्य भी साधना और भगवान के प्रति समर्पण का रूप ले लेता है। उन्होंने भगवद्गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान हमारे द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कर्म को अपने चरणों में अर्पित करने की प्रेरणा देते हैं। प्रत्येक कर्म प्रभु के चरणों में समर्पित होकर करना चाहिए।

गीता मनीषी ने कहा कि परंपराएं केवल भाषणों से नहीं, बल्कि आचरण से निर्मित होती हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अपने आचरण से सेवा और समर्पण का संदेश दिया। सेवा में कोई कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। वास्तविक बड़प्पन इस बात में है कि व्यक्ति अपने पद और प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर आवश्यकता पड़ने पर सेवा के सबसे छोटे कार्य को भी श्रद्धा से स्वीकार करे और किसी गिरे हुए को उठाने के लिए स्वयं आगे बढ़े। उन्होंने कुरुक्षेत्र की आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक भूमि नहीं, बल्कि धर्म, गीता, भक्ति और श्रीकृष्ण की कृपा से जुड़ी पवित्र भूमि है।

सूर्यग्रहण के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण, द्वारकाधीश के रूप में कुरुक्षेत्र आए और नंद बाबा, यशोदा मैया, श्री राधा एवं गोप-गोपियों के साथ उनका मिलन हुआ। यह प्रसंग कुरुक्षेत्र की दिव्यता और भगवान की लीलाओं से इसके गहरे संबंध को दर्शाता है। गीता के प्रचार प्रसार पर बल देते हुए गीता मनीषी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गीता का पाठ करना चाहिए और गीता उपदेश को अपने जीवन में उतारना चाहिए। राधाष्टमी के इस पावन अवसर पर मंदिर में उपस्थित साधु-संतों, श्रद्धालुओं एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।

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