नई दिल्ली। लोकसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक पूर्व सेना प्रमुख (आर्मी चीफ) जनरल नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का जिक्र कर दिया। इस पर सरकार की तरफ से कड़ी आपत्ति जताई गई। राहुल गांधी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने एक पूर्व सेना जनरल के संस्मरण (यादों पर आधारित किताब) से कुछ बातों का हवाला दिया।
राहुल गांधी का कहना था कि उनका स्रोत (सोर्स) भरोसेमंद है। जिस किताब का उन्होंने जिक्र किया, उसमें एक पूर्व आर्मी जनरल के अनुभव लिखे गए हैं। उन्होंने उन संस्मरणों से कुछ कथन (कोट्स) सदन में बताए। लेकिन समस्या ये थी कि वह किताब अभी आधिकारिक रूप से प्रकाशित (पब्लिश) नहीं हुई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताई आपत्ति
राहुल गांधी के इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तुरंत खड़े हो गए और उन्होंने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि लोकसभा में किसी अप्रकाशित दस्तावेज़ या किताब का हवाला देना नियमों के खिलाफ है। सदन की कार्यवाही में केवल वही तथ्य रखे जा सकते हैं जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों। उनका मानना था कि इस तरह की जानकारी सदन में रखना परंपराओं और नियमों का उल्लंघन है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर आपत्ति जताई, क्योंकि उन्होंने सदन में एक पब्लिश्ड मैगज़ीन की कहानी के कोट्स का हवाला दिया, जो सदन के नियमों के खिलाफ है। राहुल गांधी का कहना है कि उनका सोर्स भरोसेमंद है और इसमें एक पूर्व आर्मी जनरल के अप्रकाशित… pic.twitter.com/Hf0GLVBWyc
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 2, 2026
गृह मंत्री अमित शाह ने भी जताई नाराज़गी
रक्षा मंत्री के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई। उन्होंने भी यही कहा कि बिना प्रकाशित सामग्री का जिक्र करना उचित नहीं। इससे सदन की गंभीरता और नियमों पर असर पड़ता है।
स्पीकर ओम बिरला ने दी चेतावनी
लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने राहुल गांधी को आगाह करते हुए कहा कि लोकसभा की कुछ तय परंपराएं और नियम हैं। ऐसे किसी भी तथ्य का जिक्र नहीं किया जा सकता जो अभी सार्वजनिक रूप से प्रकाशित न हुआ हो। सदन की कार्यवाही में प्रमाणित और उपलब्ध जानकारी ही रखी जानी चाहिए।
राहुल गांधी का जवाब
आपत्तियों के बाद राहुल गांधी ने सफाई देते हुए कहा उनका स्रोत विश्वसनीय है। जो बातें उन्होंने कही हैं, वे एक पूर्व आर्मी जनरल के अनुभवों पर आधारित हैं। उन्होंने यह संकेत दिया कि जानकारी भरोसे के आधार पर दी गई है। हालांकि, नियमों के सवाल पर सरकार अपनी आपत्ति पर कायम रही।

