अंबाला। रविवार की देररात को हुई बारिश और तेज हवा ने आम की फसल पर खास असर डाला है।
इस बारिश ने आम बागवानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया। अनाज मंडियों में खुले में रखा गेहूं भी नहीं बच पाया।
इस बेमौसम बारिश के कारण अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आंशिक रूप से छाए बादलों के कारण बूंदाबांदी की आशंका बनी है। आने वाले दिनों में गर्मी फिर से जोर पकड़ेगी और तापमान 35 डिग्री सेल्सियस पार करने के आसार हैं। यमुनानगर के प्रमुख बागवानी बेल्ट छछरौली और खिजराबाद में आंधी ने ऐसा कहर ढाया कि पेड़ों से कच्चे आम जमीन पर बिछ गए। खानपुर निवासी बागवान राकेश कुमार ने बताया कि फसल पहले से ही बीमारी की चपेट में थी। उस पर तेज हवा और बारिश से नुकसान बढ़ गया।
रविवार रात और सोमवार तड़के चली इस तेज हवाओं ने बिजली निगम के ढांचे को हिला दिया। जिले में 45 से अधिक बिजली के पोल टूट गए और कई भारी-भरकम ट्रांसफार्मर जमीन पर आ गिरे। मरम्मत कार्य के चलते घंटों बिजली गुल रही, जिससे सरकारी नलकूप ठप रहे और लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। एसी और कूलर बंद होने से बिजली की खपत कम हो गई। यह 60 लाख यूनिट से घटकर 50 लाख यूनिट पर आ गई।
इस संबंध में डॉ. लोकेश गर्ग का कहना है कि तापमान में अचानक 10 डिग्री की गिरावट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को चुनौती देती है। हवा में नमी बढ़ने से वायरस सक्रिय हो जाते हैं, जिससे सर्दी-खांसी और वायरल बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। डॉ. गर्ग ने सलाह दी है कि लोग गर्मी समझकर एकदम ठंडा पानी न पिएं, यह गले के गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को रात के समय कूलर की सीधी हवा से बचाएं। बारिश के बाद अब उमस बढ़ जाती है। यह स्थिति अस्थमा और त्वचा रोगों के मरीजों के लिए घातक है। पसीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए पर्याप्त तरल पदार्थ लें।
पशु विशेषज्ञों के अनुसार तापमान के उतार-चढ़ाव से पशु तनाव में आ जाते हैं, जिससे दूध उत्पादन गिर सकता है। बारिश में भीगने से छोटे कटड़े-बछड़ों में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। पशुपालक भीगा हुआ सूखा चारा (तूड़ी) खिलाने से बचें, क्योंकि इससे पेट फूलने (अफारा) की बीमारी हो सकती है। पशुओं को शेड के नीचे रखें। 05-06 मई में आसमान साफ, तेज धूप निकलेगी। छह व सात को तीखी लू और शुष्क गर्मी की संभावना। इस संबंध में कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. आदित्य डबास का कहना है कि बारिश गन्ना और चारे के लिए संजीवनी है, लेकिन आम के लिए आफत। किसान मंडी में अपनी उपज को तिरपाल से ढंकना सुनिश्चित करें। अगले 48 घंटों तक फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव न करें।
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