लखनऊ: रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने शनिवार को दार्शनिक अंदाज में कहा कि यदि मन बड़ा नहीं है और दूसरों को देखकर ईर्ष्या होती है, तो यह मान लेना चाहिए कि आप पर ईश्वर की कृपा नहीं है। सिंह ने कहा,” जब उपलब्धियां मूल्यों पर आधारित होती हैं तभी जीवन सार्थक होता है। जब शिक्षा केवल डिग्री दे लेकिन उससे चरित्र का विकास न हो तो ऐसी शिक्षा का कोई मूल्य नहीं है, वह अधूरी है।” उन्होंने यहां बाबा साहब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में कहा,”पवित्र मन उसी का होता है, जिसका मन बड़ा होता है। छोटे मन का व्यक्ति कभी पवित्र मन का नहीं हो सकता।” पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ”छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।”
असली शिक्षा वही है, जो दिल, दिमाग और हाथ तीनों का विकास करे। ज्ञान और कौशल हमें सक्षम बनाते हैं, लेकिन संस्कार, संवेदनशीलता, चरित्र और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी ही उस क्षमता को सार्थक दिशा देते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल Competence नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। pic.twitter.com/UUW38WUj02
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) August 29, 2026
सिंह ने एक विदेशी अखबार द्वारा पूर्व में भारत को लेकर व्यंग्य में कार्टून बनाने का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया भारत की सफलता देखकर हैरान है। विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए रक्षामंत्री ने कहा , ”जिंदगी का सफर लंबा है और इसे साधना की तरह लेना चाहिए। मन जितना बड़ा होगा, सुख और आनंद की प्राप्ति उतनी ही अधिक होगी।” उन्होंने कहा, ”परमानंद की कोई सीमा नहीं होती। यह साधना है। जिस पर ईश्वर की कृपा होती है, उसी का मन बड़ा होता है।”
बाबा साहब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, ”डॉ. आंबेडकर को उस नल से पानी नहीं पीने दिया जाता था, जिससे सभी बच्चे पानी पीते थे। इतना अन्याय सहने के बाद भी उन्होंने भाग्य को कोसने या हिंसा का रास्ता चुनने के बजाय शिक्षा का मार्ग चुना और भारत आकर लोगों में बदलाव की इच्छा जगाई।” रक्षा मंत्री ने कहा कि कोई न कोई ‘सुपर पावर’ है जो पूरे ब्रह्मांड को निर्देशित कर रहा है तथा संतों की कही बातों को आज पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है।
अहंकार से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि अहंकार आने पर व्यक्ति की कीमत कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय व्यक्तित्व निर्माण के केंद्र होते हैं और जब संस्थान का नाम डॉ. बाबा साहब के नाम पर हो तो अपेक्षाएं और बढ़ जाती हैं। उन्होंने सफलता में माता-पिता और शिक्षकों के योगदान को याद रखना चाहिए। सिंह ने कहा,”हुनर और ज्ञान के साथ संस्कार और संवेदनशीलता जरूरी है। संस्कार के बिना ज्ञान अधूरा है और संवेदनशीलता के बिना व्यक्तित्व अधूरा है।”
बाबा साहब के हवाले से उन्होंने कहा कि स्वभाव में विनम्रता और चरित्र में नैतिकता न हो तो शिक्षित व्यक्ति हिंसक जानवर से भी अधिक खतरनाक होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे केवल अपने लिए नहीं, भारत के लिए बड़े सपने देखें और रोजगार देने वाले बनें। समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल समेत कई लोग मौजूद थे।

