
Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली हिंदी लेखिका डॉ. मेघा रानी ने अपनी शानदार लेखन क्षमता से एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने सिर्फ 120 मिनट में 120 मौलिक हस्तलिखित पन्ने लिखकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इस उपलब्धि को 2 जुलाई को बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने आधिकारिक रूप से मान्यता दी। इस रिकॉर्ड के साथ उन्हें दुनिया की सबसे तेज गति से हिंदी में लिखने वाली महिला लेखिका के रूप में पहचान मिली है।
डॉ. मेघा रानी की इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने रिकॉर्ड बनाने के दौरान जो 120 पन्ने लिखे, उनमें झारखंड के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और विरासत का विस्तृत वर्णन किया। उनकी यही हस्तलिखित पांडुलिपि जल्द ही ‘अपन झारखंड’ नाम से पुस्तक के रूप में प्रकाशित की जाएगी। इस किताब का उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक धरोहर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
इस तरह पूरा हुआ विश्व रिकॉर्ड
विश्व रिकॉर्ड बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत इसी वर्ष जनवरी में जयपुर से हुई थी। इसके बाद मई में अंतरराष्ट्रीय जजों की निगरानी में ऑनलाइन लाइव रिकॉर्ड प्रयास आयोजित किया गया। इस दौरान डॉ. मेघा ने तय समय के भीतर लगातार लिखते हुए 120 पन्ने पूरे किए। रिकॉर्ड प्रयास के बाद वीडियो, दस्तावेज और अन्य सभी साक्ष्यों की विस्तार से जांच की गई। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने इस उपलब्धि को आधिकारिक मान्यता प्रदान की। अब इस रिकॉर्ड को लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
सात वर्षों से कर रही हैं लेखन
डॉ. मेघा रानी पिछले सात वर्षों से हिंदी साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह विशेष रूप से नारी सशक्तिकरण, सामाजिक मुद्दों और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन करती रही हैं। उनकी रचनाओं को पाठकों ने काफी सराहा है। इससे पहले उनकी पुस्तक ‘श्रीकृष्ण लीला’ को भी इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिल चुका है। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार समेत कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं।
हिंदी और झारखंड को समर्पित उपलब्धि
डॉ. मेघा रानी का कहना है कि यह विश्व रिकॉर्ड उनके लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उनकी मातृभाषा हिंदी और जन्मभूमि झारखंड के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उनका मानना है कि यदि मेहनत और समर्पण के साथ लक्ष्य तय किया जाए तो कोई भी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी यह उपलब्धि झारखंड की बेटियों और युवाओं को आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही, ‘अपन झारखंड’ पुस्तक के माध्यम से राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत देश और दुनिया के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचेगी।
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