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कैंसर दवाओं पर GST में कटौती और तंबाकू पर बढ़ा टैक्स सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अहम कदम: एम्स अध्ययन

नई दिल्ली: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के इलाज को सुलभ और किफायती बनाने के लिए जीवनरक्षक कैंसर दवाओं को जीएसटी से छूट देना और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाना देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम हैं। यह निष्कर्ष अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ऑन्कोलॉजिस्ट्स द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में सामने आया है।

अध्ययन के अनुसार, जीएसटी परिषद ने सितंबर में पिछले वर्ष हुई अपनी 56वीं बैठक में 33 जीवनरक्षक दवाओं (जिनमें कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं) को पूरी तरह जीएसटी से मुक्त करने की सिफारिश की थी। इनमें 12 प्रतिशत से शून्य प्रतिशत किए गए कैंसर रोधी ड्रग्स और दुर्लभ बीमारियों व कैंसर की 3 अहम दवाएं शामिल हैं, जिन पर पहले 5 प्रतिशत जीएसटी लगता था। अध्ययन में कहा गया है कि इन फैसलों से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सस्ती और सुलभ बनी हैं तथा मरीजों पर पड़ने वाला जेब से खर्च (आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपैंडिचर) कम हुआ है।

एम्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. अभिषेक शंकर ने एक बातचीत में कहा, ‘भारत में हालिया जीएसटी सुधार कैंसर उपचार को अधिक किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। 33 जीवनरक्षक कैंसर और दुर्लभ रोगों की दवाओं को जीएसटी से मुक्त करने और चिकित्सा उपकरणों पर टैक्स घटाने से सरकार ने सीधे तौर पर मरीजों और उनके परिवारों पर वित्तीय बोझ कम किया है।’ अध्ययन में यह भी बताया गया कि जीएसटी परिषद ने तंबाकू उत्पादों पर टैक्स स्लैब बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है, जो देश में किसी भी वस्तु वर्ग पर सबसे अधिक है।

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