
चंडीगढ़। सरकार ने नए राशन डिपो खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव जे गणेशन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब डिपो आवंटन में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
सरकार का लक्ष्य है कि हर ब्लॉक में कम से कम एक डिपो महिला स्वयं सहायता समूह की ओर से संचालित होगा। रोस्टर प्रणाली को इस तरह तैयार किया प्रत्येक तीसरा खाली स्थान महिला के लिए आरक्षित होगी। इसमें एसिड अटैक पीड़ित, विधवा, तलाकशुदा और एकल माताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। नए नियमों के तहत डिपो संचालक बनने के लिए केवल सिफारिश काम नहीं आएगी।
आवेदक का कम से कम 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना और कंप्यूटर संचालन में सक्षम होना अनिवार्य है। आयु सीमा 21 से 45 वर्ष तय की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव स्थानीयता को लेकर है; जिस वार्ड या गांव में डिपो खाली है, आवेदक वहीं का स्थायी निवासी होना चाहिए। इसके अलावा, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि मौजूदा जनप्रतिनिधि (पंच, सरपंच या पार्षद) और उनके नजदीकी रिश्तेदार इस दौड़ से बाहर रहेंगे। यदि कोई डिपो धारक भविष्य में चुनाव जीतता है, तो उसका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।
शहरी क्षेत्रों में वार्डवार और ग्रामीण क्षेत्रों में गांवों के वर्णानुक्रम के हिसाब से रोस्टर तैयार किया जाएगा। इस पूरी कवायद का मकसद डिपो के बीच की दूरी कम करना और उपभोक्ताओं को लंबी लाइनों से निजात दिलाना है। 500 कार्डों पर एक डिपो होने से न केवल अनाज वितरण सुगम होगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पूरी चयन प्रक्रिया ऑनलाइन और मेरिट आधारित होगी, ताकि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।
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