नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बढ़ने का आम आदमी के साथ-साथ हर वर्ग पर असर पड़ेगा। इन कीमतों के बढ़ने के साथ ही पक्ष विपक्ष के नेताओं की बयानबाजी भी बढ़ गई है। विपक्ष का कहना है कि 10 दिनों में तीसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा सरकार की अदूरदर्शिका परिचय है। उनका कहना है कि इससे आम आदमी को मुश्किल का सामना करना पड़ेगा।
विपक्षी नेताओं के सरकार पर आरोप
देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं में बयानबाजी शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष ईंधन की कीमतों के पीछे वैश्विक बाजार को कारण बता रहा है। जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि यह सरकार की नाकामी है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से आम जनता पर महंगाई का दोहरा बोझ पड़ता है और इससे हर आवश्यक वस्तु महंगी हो जाती है। इस बारे में राजद के तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर डबल सेंचुरी का रिकॉर्ड बनाकर ही मानेगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट होने के बावजूद घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम कम नहीं किए जाते।
सत्ता पक्ष का बचाव और उनके तर्क
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति बताया है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय वैट और अन्य करों में भारी वृद्धि की गई थी। भाजपा के पीयूष गोयल का तर्क है कि हालिया मूल्यवृद्धि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति की बाधाओं और पश्चिमी एशिया के संघर्ष का परिणाम है। सरकार ने आम जनता से ईंधन की खपत को सीमित रखने और जरूरत के अनुसार ही वाहनों का उपयोग करने की अपील भी की है।
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