
Road Accidents : देशभर में सड़क हादसों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। बीते एक महीने में राजस्थान और तेलंगाना में हुए कई भीषण हादसों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इनमें अब तक 60 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हैं। ज्यादातर हादसे तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुए हैं।
14 अक्टूबर को राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक निजी बस में अचानक आग लग गई। बस जोधपुर की ओर जा रही थी, तभी थईयात गांव के पास यह दर्दनाक घटना हुई। हादसे के समय बस में 35 यात्री सवार थे। भीषण आग की चपेट में आने से 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रूप से झुलस गए।
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28 अक्टूबर को जयपुर के मनोहरपुर थाना क्षेत्र के टोडी गांव में मजदूरों से भरी बस 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गई। बस में करंट फैलने से दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब 12 लोग घायल हुए। हादसे के बाद बस में आग लग गई, जिससे भगदड़ मच गई।
2 नवंबर को जोधपुर जिले के फलोदी इलाके में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। श्रद्धालुओं से भरी एक टैंपो ट्रैवलर सड़क किनारे खड़े ट्रक ट्रेलर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हुए।
3 नवंबर की सुबह तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के मिर्जागुड़ा में टीजीएसआरटीसी की बस एक कंकड़ से भरी टिप्पर से टकरा गई। हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा घायल हुए। टक्कर के बाद टिप्पर में भरे कंकड़ बस के अंदर जा घुसे, जिससे कई यात्री दब गए।
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उसी दिन जयपुर में एक और भीषण हादसा हुआ, जब एक तेज रफ्तार डंपर ने 10 वाहनों को टक्कर मार दी। यह हादसा शहर के व्यस्त इलाके में हुआ, जिसमें अब तक 14 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और कई घायल हैं।
लगातार हो रहे इन हादसों ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रफ्तार, खराब सड़कें और सुरक्षा मानकों की अनदेखी इन घटनाओं के पीछे बड़ी वजह हैं। अब जरूरत है कि प्रशासन सख्त कदम उठाए, ताकि सड़कों पर इंसानी जानों का यह सिलसिला रुक सके।