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RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा- हिंदुओं में एकता की कमी और बार-बार गुलामी…

RSS Keshav Baliram Hedgewar

नेशनल डेस्कः मोहन भागवत ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराना और समाज में एकता लाना था। संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार ने महसूस किया कि उस समय हिंदू समाज बिखरा हुआ था, इसलिए उसे एकजुट और मजबूत बनाना जरूरी था। भागवत ने कहा कि हेडगेवार ने भारत की आज़ादी के लिए कई तरह से काम किया। उन्होंने सिर्फ एक रास्ता नहीं अपनाया, बल्कि राजनीतिक आंदोलनों में हिस्सा लिया और जरूरत पड़ने पर सशस्त्र संघर्ष (हथियारों के साथ विरोध) का भी समर्थन किया। इससे पता चलता है कि वे देश को आज़ाद कराने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहते थे।

समाज की कमजोरी को समझा
हेडगेवार ने आज़ादी के संघर्ष के दौरान यह महसूस किया कि सिर्फ अंग्रेजों की ताकत ही भारत की गुलामी का कारण नहीं थी। उन्होंने देखा कि हमारे अपने समाज में भी कुछ कमजोरियां थीं। सबसे बड़ी कमी थी – एकता की कमी। उन्होंने कहा कि जब तक समाज एकजुट नहीं होगा,  तब तक मजबूत नहीं बन पाएगा।

 

एकता क्यों जरूरी थी?
भागवत के अनुसार, हिंदू समाज में अलग-अलग परंपराएं और विविधताएं हैं, जो अच्छी बात है। लेकिन केवल विविधता ही काफी नहीं है। समाज को सामूहिक शक्ति (एकजुट ताकत) भी चाहिए। इसलिए हेडगेवार चाहते थे कि समाज एकजुट होकर मजबूत बने।

हेडगेवार का सपना कैसा समाज था?
हेडगेवार चाहते थे कि लोग मजबूत हों, निडर (डरने वाले नहीं) हों, अच्छे गुणों वाले (सद्गुणी) हों।  भागवत ने बताया कि हिंदुत्व का मतलब है अपने रास्ते पर चलना और दूसरों का सम्मान करना। मिल-जुलकर शांति से रहना।

संघ की प्रार्थना क्या बताती है?
भागवत ने कहा कि संघ की प्रार्थना में इन्हीं गुणों की झलक मिलती है। हेडगेवार का मानना था कि भारत पहले भी कई बार विदेशी ताकतों से हार चुका है। इसका कारण हमारी अंदरूनी कमजोरियां थीं। अगर इन कमजोरियों को दूर नहीं किया गया, तो देश को बार-बार संघर्ष करना पड़ेगा।

RSS किसी के खिलाफ नहीं बना
भागवत ने साफ कहा कि संघ की स्थापना किसी के खिलाफ नहीं की गई थी। बल्कि देश के लिए काम करने के उद्देश्य से हुई थी। इसका लक्ष्य था मातृभूमि को आज़ाद कराना। समाज को मजबूत और संगठित बनाना।

 

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