Last Updated: November 5, 2026

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सोशल मीडिया के जरिए Pakistani Agent के संपर्क में आया साहिल, दुबई के रास्ते भारतीय सिम कार्ड भेजे

August 29, 2026

सोशल मीडिया के जरिए Pakistani Agent के संपर्क में आया साहिल, दुबई के रास्ते भारतीय सिम कार्ड भेजे

नेशनल डेस्कः दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक कथित जासूसी मॉड्यूल का खुलासा करते हुए दिल्ली के एक पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। स्पेशल सेल ने मामले संबंधी खुलासा करते हुए  बताया कि 2024 में मोहम्मद साहिल एक दोस्त के माध्यम से इंस्टाग्राम पर एक पाकिस्तानी एजेंट से पहचान हुई। इसके बाद वह लगातार उसके संपर्क में रहने लगा। इसी दौरान साहिल की मुलाकात समीरा से हुई और बाद में दोनों ने शादी कर ली। पुलिस का कहना है कि शादी के बाद दोनों कथित तौर पर इस नेटवर्क का हिस्सा बन गए।

जांच के अनुसार, पाकिस्तानी एजेंट ने बाद में दोनों की मुलाकात एक अन्य खुफिया ऑपरेटिव से कराई। धीरे-धीरे इन लोगों ने साहिल और समीरा का भरोसा जीता और उन्हें अपने लिए काम करने के लिए तैयार किया। पुलिस का दावा है कि इसके बदले उन्हें पैसे देने का लालच दिया गया।

दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजे गए भारतीय सिम कार्ड
जांच एजेंसियों के अनुसार, साहिल और समीरा ने वर्ष 2024 और 2025 के दौरान कुल आठ भारतीय सिम कार्ड पाकिस्तान भेजे। पुलिस का कहना है कि ये सिम कार्ड सीधे पाकिस्तान भेजने के बजाय दुबई के रास्ते वहां पहुंचाए गए। आरोप है कि इस काम के बदले दोनों को करीब 30 हजार रुपये मिले। पुलिस के मुताबिक, पाकिस्तान पहुंचने के बाद इन भारतीय नंबरों पर व्हाट्सऐप अकाउंट बनाए या सक्रिय किए गए। इन नंबरों का कथित तौर पर भारत से जुड़ी जानकारी हासिल करने और लोगों से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किया गया।

भारतीय व्हाट्सऐप ग्रुप्स में शामिल होने का आरोप
स्पेशल सेल के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे कथित ऑपरेटिव्स ने भारतीय सिम कार्डों से चलने वाले नंबरों का इस्तेमाल कुछ भारतीय व्हाट्सऐप ग्रुप्स में शामिल होने के लिए किया। इन ग्रुप्स के जरिए भारत से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश की गई। पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने भारतीय नागरिकों से संपर्क भी किया और उनसे संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास किया।

जांच एजेंसियों को शक है कि भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल केवल व्हाट्सऐप ग्रुप्स में प्रवेश के लिए ही नहीं, बल्कि भारत में मौजूद लोगों तक पहुंच बनाने और एक बड़ा संपर्क नेटवर्क तैयार करने के लिए भी किया जा रहा था।

कैंटोनमेंट इलाकों की जानकारी जुटाने के लिए लोगों की भर्ती
पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर इस नेटवर्क के काम करने के तरीके से जुड़ी और जानकारी सामने आई है। स्पेशल सेल का दावा है कि साहिल को देश के अलग-अलग कैंटोनमेंट यानी सैन्य क्षेत्रों की रेकी के लिए लोगों को तैयार करने और भर्ती करने का काम दिया गया था। इसके अलावा उस पर ऐसे सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी होने का भी आरोप है, जिनके खिलाफ कोर्ट मार्शल से जुड़े मामले अलग-अलग ट्रिब्यूनल में चल रहे हैं। पुलिस के अनुसार, साहिल का काम नेटवर्क के लिए नए लोगों को जोड़ना और उन्हें कथित फील्ड गतिविधियों के लिए तैयार करना भी था।

मोबाइल फोन की जांच से मिले कथित सबूत
मोहम्मद साहिल को स्पेशल सेल ने दिल्ली के सराय काले खां इलाके से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसके मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच की गई। पुलिस का दावा है कि फोन में पाकिस्तान में मौजूद कथित हैंडलर्स के साथ बातचीत और संपर्क से जुड़े डिजिटल सबूत मिले। साहिल से पूछताछ के दौरान पुलिस को समीरा की कथित भूमिका के बारे में जानकारी मिली। जांच एजेंसी के अनुसार, भारतीय सिम कार्ड उपलब्ध कराने में समीरा की भूमिका महत्वपूर्ण थी। इसके बाद पुलिस ने समीरा को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों के मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल सामग्री मिलने की बात पुलिस ने कही है।

कौन हैं मोहम्मद साहिल और समीरा?
पुलिस के अनुसार, मोहम्मद साहिल का जन्म 2001 में हुआ था। उसने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय यानी IGNOU से बीए की पढ़ाई की थी। इसके बाद वह एक वकील के साथ काम कर रहा था और एलएलबी की तैयारी कर रहा था। जून 2025 में उसने अपनी नौकरी छोड़ दी थी और उसके बाद वह बेरोजगार था। वहीं, समीरा का जन्म 2005 में हुआ था। उसने 12वीं कक्षा के बाद पत्राचार माध्यम से बीए की पढ़ाई की। गिरफ्तारी से पहले वह नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम कर रही थी। फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके डिजिटल उपकरणों तथा संपर्कों की जांच की जा रही है। पुलिस के दावों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ होगी।

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