Last Updated: November 5, 2026

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संत रविदास जी की जयंती पर राष्ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं

February 1, 2026

संत रविदास जी की जयंती पर राष्ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं

Sant Ravidas Jayanti 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई प्रमुख नेताओं ने संत रविदास की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने कहा कि गुरु रविदास महाराज के विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था, जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट में लिखा, ‘मैं सभी देशवासियों को गुरु रविदास जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। समानता और समरसता पर आधारित उनका संदेश समाज के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है। त्याग और तपस्या के मार्ग पर चलकर वे जाति और धर्म के भेदभाव को दूर करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे। आइए इस अवसर पर, सेवा और भक्ति पर आधारित उनकी शिक्षाओं को अपनाएं और विकसित राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दें।‘

प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, ‘मानवता के अनन्य उपासक महान संत श्री गुरु रविदास महाराज जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। उनके विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था, जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है। उन्होंने सामाजिक समरसता और सद्भावना के जिस दीप को प्रज्वलित किया, वह देशवासियों के पथ को सदैव आलोकित करता रहेगा।‘

इस अवसर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, ‘समस्त देशवासियों को संत रविदास जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। रविदास जी ने एक तरफ जहां कवि के रूप में भक्ति आंदोलन को आगे बढ़ाया, वहीं एक समाज सुधारक के रूप में भेदभाव-मुक्त समाज निर्माण के लिए लोगों को प्रेरित किया। उनका ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ भक्ति की असली सीख देता है। संत रविदास जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।‘

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी गुरु रविदास की जयंती पर उन्हें नमन किया। उन्होंने लिखा, ‘भक्ति, करुणा और सामाजिक समरसता के दिग्दर्शन संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। समानता, बंधुत्व और मानव-मर्यादा के आलोक से भरे उनके उपदेश आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने भेदभाव, छुआछूत और कुरीतियों के विरुद्ध अदम्य साहस से संघर्ष किया और सेवा, सौहार्द तथा बंधुत्व की ऐसी धारा प्रवाहित की, जो युगों-युगों तक जनमानस का पथ प्रशस्त करती रहेगी। उनकी शिक्षाएं और उनके विचार हमारे सामाजिक और नैतिक मूल्यों को निरंतर उज्ज्वल बनाते रहेंगे।‘

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