Last Updated: September 21, 2026

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Haryana News : सरपंच चुनाव : एक कुर्सी, तीन भाई, अब पारिवारिक रण

May 1, 2026

Haryana News : सरपंच चुनाव : एक कुर्सी, तीन भाई, अब पारिवारिक रण

झज्जर। यहां के गांव बादसा की गलियों में सरपंची का चुनाव जोर पकड़ रहा है। यहां शोर का कारण चुनावी हलचल नहीं बल्कि चुनाव में तीन सगे भाइयों का आमने सामने खड़े होना है। लोगों को लगता है कि चुनावा परिणाम कुछ भी हो कुर्सी इसी परिवार में रहेगी। ऐसे में सवाल यह भी है कि कुर्सी तो मिल जाएगी, परंतु क्या पहले वाला सदभाव बना रहेगा या नहीं।

पहली बार सगे भाई आमने-सामने

बता दें कि पूर्व सरपंच ज्ञानचंद की विरासत पर कब्जे के लिए तीनों बेटों ने नामांकन दाखिल कर दिया। इससे मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प बन गया। 45 वर्षीय दीपक, 43 वर्षीय रमेश और 40 वर्षीय मनोज में छिड़ी इस जंग ने ग्रामीणों को भी हैरत में डाल दिया है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी सगे भाइयों को इस तरह आमने-सामने नहीं देखा।

सभी का अपना-अपना तर्क

बड़े बेटे दीपक का कहना है कि उन्होंने पिता के कार्यकाल में साथ रहकर जमीनी स्तर पर काम किया है और सीखा भी है। वे कहते हैं कि पिता के साथ कदम-से-कदम मिलाकर पंचायत के काम संभाले हैं, इसलिए गांव की समस्याओं और उनके समाधान को बेहतर समझता हूं। दूसरे भाई रमेश जो गुरुग्राम में वकील हैं, अपनी शिक्षा को हथियार बना रहे हैं। रमेश का मानना है कि एक वकील और शिक्षित व्यक्ति ही कानूनी पेचीदगियों को समझकर गांव का चहुंमुखी विकास कर सकता है। उनके अनुसार गांव को अब एक नए और आधुनिक नजरिए की जरूरत है।

कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं

सबसे छोटे भाई मनोज भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। मनोज का दावा है कि पिता का उनके प्रति विशेष लगाव था और वे उनके कामकाज के तरीकों से पूरी तरह वाकिफ हैं। हालांकि, भाइयों के बीच इस टकराव ने परिवार के बड़े-बुजुर्गों की चिंता बढ़ा दी है। मनोज ने दबे स्वर में स्वीकार किया कि परिवार और गांव के वरिष्ठ लोग अब भी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा बुजुर्ग जो भी फैसला लेंगे, मैं उसका आदर करूंगा, लेकिन फिलहाल मेरा ध्यान चुनाव पर है।

फंस गए ग्रामीण, किसे दें वोट

बादसा गांव के मतदाताओं के लिए भी यह स्थिति किसी धर्मसंकट से कम नहीं है। कल तक जो भाई अपने पिता ज्ञानचंद के लिए एक साथ होकर वोट मांगते थे, आज वे अलग-अलग टोलियां बनाकर ग्रामीणों के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। गांव की गलियों में सीवरेज, पक्की सड़कें और पीने के पानी जैसे मुद्दे तो हैं, लेकिन इस बार मतदाता यह देख रहे हैं कि पिता की असली विरासत यानी गांव की सेवा का जुनून किस भाई में सबसे ज्यादा है। फिलहाल, इस ‘भाई

बनाम भाई’ की जंग ने बादसा के उपचुनाव को प्रदेश की सबसे हॉट सीट बना दिया है।

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